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शोक में डूबा राजभवन, यूं ही उन्हें नहीं कहते थे बाबूजी, छलके कर्मचारियों के आंसू
लखनऊ के मेदांता अस्पताल में करीब 40 दिन से भर्ती राज्यपाल लालजी टंडन के निधन की खबर से राजभवन शोक में डूब गया है। मंगलवार सुबह यह खबर राजभवन पहुंची तो टंडन की सेवा में रत रहने वाले अर्दली, रसोईया, माली सहित अन्य की आंखें नम हो गईं।
बाबूजी ने कहा था, लौटकर खाऊंगा अचार, पर भगवान को कुछ और ही मंजूर था
राज्यपाल टंडन के लिए खाना बनाने वाले रसोईया यंक बहादुर जैसे टूट गए हैं। उनका टंडन से जुड़ाव ही ऐसा था। खाने के शौकीन होने के कारण टंडन उनसे लगातार बात करते थे। यंक बताते हैं कि बाबूजी को पकोड़े खूब पसंद थे। वे मसालेदार सब्जियां, घी-मक्खन रुचि से खाते थे। साथ ही उत्तर प्रदेश के पकवान बनाने की विधियां भी बताते थे। यंक बताते हैं कि लखनऊ जाने से पहले मुझसे अपनी पसंद का अचार बनवाया था और कहा था कि लौटकर खाऊंगा, पर भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
निधन की खबर आते ही छलके अर्दलियों के आंसू, राजभवन में पसरा सन्नाटा
निधन की खबर आते ही राजभवन में सन्नाटा पसर गया और कर्मचारी प्रति पल की खबरों के लिए टीवी के सामने बैठ गए। महज 11 माह के कार्यकाल में टंडन ने उनसे दिली रिश्ते जो बना लिए थे।
कर्मचारी टंडन को यूं ही बाबूजी नहीं कहते थे
कर्मचारी टंडन को यूं ही बाबूजी नहीं कहते थे। राजा से रंक तक सभी से समान व्यवहार रखने वाले टंडन उनसे घर के मुखिया की तरह जो पेश आते थे। वे कर्मचारियों से गलती होने पर नाराज नहीं होते थे, बल्कि उन्हें समझाते थे। आज राजभवन के कर्मचारियों के मन में खालीपन है, पीढ़ा है। वे एक महीने से 'बाबूजी' के लौटने की राह तक रहे थे और आज लखनऊ से दिल को झकझोरने वाली खबर आई।
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