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चार धाम यात्रा शुरू होने के पक्ष में नहीं पुजारी, कहा- बढ़ सकता है COVID-19 का खतरा
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार उत्तराखंड सरकार 8 जून से चार धाम की यात्रा (Char Dham Yatra) शुरू करने की में है. वहीं राज्य के पुजारी इसे लेकर आशंकित हैं. पुजारियों का मानना है कि इससे पहाड़ी क्षेत्रों में कोरोना वायरस के फैलने की संभावना बढ़ सकती है.
पुजारी चार धाम यात्रा शुरू होने के पक्ष में नहीं
केदारनाथ मंदिर के पुजारी नहीं चाहते हैं कि चार धाम की यात्रा शुरू की जाए. उन्होंने शुक्रवार को सचिव, पर्यटन और संस्कृति विभाग को पत्र लिखकर चार धाम यात्रा शुरू नहीं करने का अनुरोध किया है. श्री केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष विनोद प्रसाद शुक्ला ने पत्र में कहा कि पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं है. उन्होंने लिखा, "अगर तीर्थ यात्रियों के इन तीर्थस्थलों पर आने के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में मामलों में वृद्धि होती है, तो महामारी के प्रकोप को नियंत्रित करना मुश्किल होगा. वर्तमान में, स्थानीय लोगों को सड़कों पर तैयारियों की कमी और राज्य में कोरोना मामलों में वृद्धि के कारण मंदिरों तक पहुंचना मुश्किल है. इसलिए, निकट भविष्य में चार धाम यात्रा शुरू करने पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए और स्थिति में सुधार होने तक स्थगित कर दिया जाना चाहिए."
प्रबंधन बोर्ड की तैयारी शुरू
चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवीनाथ रमन ने कहा कि रोजाना सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखने और तीर्थ यात्रियों की संख्या सीमित करने के की तैयारी शुरू हो चुकी है.
उन्होंने कहा, "हमने अपनी तरफ से इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है. सोशल और फिजिकल डिस्टेंस के मानदंडों का पालन करते हुए ही तीर्थ यात्रियों को मंदिरों में दर्शन के लिए अनुमति दी जाएगी. अगर हम तीर्थ यात्रियों के बीच दर्शन के लिए दो मीटर की दूरी रखते हैं, तो अनुमान है कि एक दिन में बद्रीनाथ में 1,800 तीर्थयात्रियों और केदारनाथ मंदिर में लगभग 800-900 तीर्थयात्रियों को अनुमति दी जा सकती है."
तीर्थ यात्रियों के लिए बनाए गए नियम
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