होम सरकारों को शराब की होम डिलिवरी पर विचार करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
सरकारों को शराब की होम डिलिवरी पर विचार करना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान शराब की बिक्री शुरू किए जाने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो, इसके लिए राज्य सरकारों को शराब की होम डिलिवरी पर विचार करना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी शराब की दुकानें खोले जाने के खिलाफ दायर एक याचिका पर की. याचिका में कहा गया था कि इस फैसले से कोरोना वायरस के मद्देनजर जारी सोशल डिस्टेंसिंग के दिशा-निर्देश की धज्जियां उड़ रही हैं.
करीब डेढ़ महीने के लॉकडाउन के बाद सरकार ने कुछ ही दिन पहले शराब की दुकानें खोलने की छूट दी थी. लेकिन कई जगह दुकानों पर भारी भीड़ की खबरें आईं. दिल्ली में तो कुछ दुकानों को इसके चलते जल्दी ही बंद करना पड़ा.
उधर, खबर है कि शराब की होम डिलिवरी को लेकर चर्चा जारी है. बताया जा रहा है कि एप आधारित फूड डिलिवरी कंपनी जोमैटो इस पर विचार कर रही है. फिलहाल शराब की होम डिलिवरी को लेकर भारत में कोई कानून नहीं है. शराब कंपनियां, जोमैटो और कुछ दूसरे पक्ष चाह रहे हैं कि इसकी इजाजत दी जानी चाहिए. इसे लेकर लामबंदी जारी है.
उधर, दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने शराब की बिक्री के लिए ई-टोकन व्यवस्था शुरू की है. सरकार के मुताबिक ई-टोकन व्यवस्था के जरिये दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा सकेगा. इसके लिए सरकार ने एक वेब लिंक (www.qtoken.in) जारी किया है. जो लोग दिल्ली में शराब खरीदना चाहते हैं, वे इस लिंक पर जाकर शराब खरीदने का समय ले सकते हैं.
वेब लिंक पर जाकर ग्राहक को अपना नाम और मोबाइल नंबर के साथ-साथ अपनी नजदीकी दुकान का पता और उसका नाम भी चुनना होगा. इसके बाद उसके मोबाइल पर ई-कूपन भेजा जाएगा जिसमें शराब खरीदने का समय भी लिखा होगा. दिल्ली सरकार का दावा है कि उसकी इस नई व्यवस्था के चलते शराब की दुकानों पर भीड़ जमा नहीं होगी क्योंकि एक समय में एक शराब की दुकान पर केवल 50 लोगों को ही टोकन जारी किए जाएंगे. हालांकि, जो लोग बिना टोकन लिए लाइन में लगकर शराब खरीदना चाहते हैं, उनके लिए भी शराब की दुकानों पर अलग लाइन लगवाई जायेगी.
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