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मध्य प्रदेशः सिंधिया कांग्रेस में हाशिए पर सिमटे, पर बीजेपी में क्या मिलेगा?
होली से एक दिन पहले और होली के दिन भी भोपाल से लेकर नई दिल्ली के सियासी गलियारों में ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम सुर्ख़ियों में बना रहा. उनकी सोनिया गांधी से 'बात', प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 'मुलाक़ात' और 'बीजेपी में शामिल' होने के क़यास लगाए जाते रहे.
इनमें एक बात तो स्पष्ट हो चुकी है कि सिंधिया ने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया है. मगर वो अब बीजेपी का झंडा थामेंगे या नहीं, इसे लेकर अनिश्चय बना हुआ है. हालाँकि मौजूदा परिस्थितियों में सिंधिया के राजनीतिक करियर का रास्ता अब जिस ओर जा सकता है, उसमें बीजेपी का पता सबसे मज़बूत संभावनाओं वाला दिखाई देता है.
वैसे ये दिलचस्प है कि इन दो दिनों में जब सिंधिया अटकलों के केंद्र में थे, स्वयं सिंधिया ने बस दो शब्द बोले - हैप्पी होली.
मगर अपने इस्तीफ़े की कॉपी, जो उन्होंने सोमवार को ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजी थी, उसे एक दिन बाद उन्होंने ट्विटर पर जारी कर दिया.
और इसकी भाषा स्पष्ट थी. उन्होंने लिखा कि वो "कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहे हैं लेकिन इस रास्ते की शुरुआत एक साल पहले हो चुकी थी."
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हुआ था पिछले एक साल में?
के पी यादव और ज्योतिरादित्य सिंधिया की वायरल तस्वीर
लोक सभा चुनाव में प्रतिष्ठा टूटी
ये कहना ग़लत नहीं होगा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले कुछ अरसे से अपने राजनीतिक करियर के सबसे लो प्वाइंट पर चल रहे हैं.
पहले 2018 में कमलनाथ से वे राज्य के मुख्यमंत्री पद की होड़ में पिछड़ गए और उसके बाद अपने संसदीय प्रतिनिधि रहे केपी यादव से 2019 में परंपरागत लोकसभा सीट गुना में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
इसी चुनाव के दौरान जिस पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन्हें ज़िम्मेदारी मिली वहां भी पार्टी अपना खाता नहीं खोल पायी.
केपी यादव की जीत के वक़्त उनकी एक सेल्फ़ी बहुत वायरल हुई थी, जिसमें सिंधिया गाड़ी के अंदर बैठे थे और केपी यादव बाहर से सेल्फ़ी ले रहे थे. केपी यादव थोड़े समय तक सिंधिया के संसदीय प्रतिनिधि भी रहे थे.
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