होम अमेरिका-तालिबान में कल होगा ऐतिहासिक समझौता, भारत की कड़ी नजर,
अमेरिका-तालिबान में कल होगा ऐतिहासिक समझौता, भारत की कड़ी नजर,
शनिवार को अमेरिका और तालिबान के बीच होने वाले ऐतिहासिक समझौते से काबुल में तालिबान के आने का रास्ता लगभग खुल गया है। ऐसे में भारत की एक बड़ी चिंता तो यह है कि पाकिस्तान परस्त तालिबान कहीं फिर से भारत के खिलाफ गतिविधियों का केंद्र न बन जाए। दूसरी बड़ी चिंता यह है कि अरबों डॉलर की लागत से वहां जो सैकड़ों परियोजनाएं चलाई जा रही हैं उनका क्या होगा।
भारत ने कहा- अफगान की जनता की भागीदारी वाली सरकार को ही सत्ता सौंपी जानी चाहिए
इन चिंताओं के बीच शुक्रवार को काबुल में विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने अफगानिस्तान सरकार के कार्यवाहक विदेश मंत्री हारुन चाकासारी से मुलाकात की है। भारत ने इस पक्ष को दोहराया कि अफगानिस्तान को लेकर जो भी शांति समझौता हो उसमें यह सुनिश्चित हो कि वहां की जनता की पूरी भागीदारी हो और अफगानिस्तान की जनता की भागीदारी वाली सरकार को ही सत्ता सौंपी जानी चाहिए।
अमेरिका-तालिबान करार से अफगान में नई सरकार के गठन का होगा रास्ता साफ
अमेरिका व तालिबान के बीच होने वाले समझौते से अफगानिस्तान में नई सरकार के गठन का रास्ता भी साफ होगा व अमेरिकी सैनिकों की घर वापसी का सिलसिला भी शुरु होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सोमवार को नई दिल्ली में यह स्पष्ट किया था कि वह अब अफगानिस्तान में पुलिस की भूमिका निभाने को तैयार नहीं है।
विदेश सचिव श्रृंगला और अफगान के विदेश मंत्री ने की रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि विदेश सचिव श्रृंगला और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री के बीच हुई मुलाकात में द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की गई है। विदेश सचिव ने भारत की तरफ से यह आश्वस्त किया कि अफगानिस्तान में स्थाई शांति, सुरक्षा व विकास के लिए वहां की जनता को हमेशा मदद करता रहेगा।
भारत की मदद से अफगानिस्तान में कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है
माना जा रहा है कि दोनों के बीच भारत की मदद से वहां चलाई जा रही परियोजनाओं के भविष्य को लेकर भी चर्चा हुई है। भारत पिछले डेढ़ दशकों से वहां कई बड़ी परियोजनाओं (संसद भवन का निर्माण, बिजली बनाने व सिंचाई करने के लिए बांध आदि) समेत कई छोटी-छोटी परियोजनाओं (स्कूलों, पुलों, अस्पतालों आदि का निर्माण) का काम किया है। साथ ही सॉफ्ट डिप्लोमेसी के तहत अफगानिस्तान में खेल व संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काफी मदद की है।
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