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कोरोना वायरस : चीन ने भारत से मांगे N-95 मास्क, भारतीय बाजारों में होने लगी कमी
कोरोना वायरस का प्रकोप चीन में बढ़ता जा रहा है इसके वायरस से अब तक 259 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 11,791 लोग संक्रमित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस का ग्लोबल इमरजेंसी घोषित कर चुका है। इस वायरस का संक्रमण दुनिया के करीब 20 देशों में देखा जा रहा है। कोरोना के महामारी का रूप लेता देख सरकारें सतर्क हैं और इससे निपटने की उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है। सरकारों के सतर्क होने के बाद लोगों ने भी एहतियात बरतना शुरू कर दिया है। भारत के स्थानीय बाजारों में एन 95 मास्क की कमी होने लगी है।
भारत में एन-95 मास्क का निर्माण करने वाली कंपनियों को चीन से बड़ी मात्रा में इसका निर्यात करने का आर्डर मिला है। मुदरई में एन-95 का उत्पादन करने वाली कंपनियां चीन और घरेलू बाजार का ऑर्डर पूरा करने के लिए अपने काम के घंटों को बढ़ा दिया है।
ऑल इंडिया फूड एंड ड्रग लाइसेंस एसोसिएशन (एएफडीएलएच) ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को लिखे पत्र में सर्जिकल फेस मॉस्क एवं एन-95 मॉस्क के निर्यात पर रोक लगाने की मांग की है। ये बताया जा रहा है कि स्थानीय बाजारों में अब ये मॉस्क मुश्किल से मिल पा रहे हैं।
एएफडीएलएच के पत्र के मुताबिक, ' मॉस्क बनाने वालों को बड़ी मात्रा में ऑर्डर मिल रहे हैं और इन्हें इनकी वास्तविक दाम से 10 गुना अधिक कीमत में बेचा जा रहा है। ऐसे में भारतीय लोगों को जब इस मास्क की जरूरत होगी तो उन्हें यह मिलने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए मॉस्क के निर्यात एवं इनकी कीमतों पर नियंत्रण जरूरी है।'
बता दें कि एन-95 मॉस्ट की बनावट ऐसी है कि यह चेहरे पर अच्छी तरफ फिट होता है और यह हवा में मौजूद धूलकणों को अच्छी तरह से फिल्टर करता है। एन-95 फेस मॉस्क ऑनलाइन भी उपलब्ध होता है और ऑर्डर करने के बाद अधिकतम दो सप्ताह के भीतर उपभोक्ता के पास इसकी डिलीवरी हो जाती है।
एएफडीएलएच के एक अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एन-95 की मांग काफी बढ़ गई है। इसे देखते हुए इसे बनाने वाले स्थानीय बाजारों की जरूरत को नजरंदाज कर रहे हैं और ये अपने निर्यात पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। मॉस्क का निर्यात जिस तरह से हो रहा है उस पर रोक लगाने की जरूरत है, नहीं तो भारतीयों को जब मॉस्क की जरूरत पड़ेगी तो ये बाजार में उपलब्ध नहीं होंगे।
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