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एक दूसरे से अलग नहीं हो सकते हैं कांग्रेस और DMK, जानें क्यों
कांग्रेस (Congress) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) अपने बीच के मतभेदों को सुलझाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं. दोनों दलों ने अपने बीच सार्वजनिक बयानबाजी को भी नियंत्रित करना शुरू कर दिया है. शनिवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के विश्वास पात्र और पुडुचेरी (Puducherry) के सीएम वी नारायणसामी (V Narayansami) ने डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन (MK Stalin) से मुलाकात करने के लिए चेन्नई (Chennai) पहुंचे.
दोनों सहयोगियों के बीच उस वक्त मतभेद सामने आए जब तमिनलाडु (Tamilnadu) के कांग्रेस अध्यक्ष केएस अलगिरी ने नगर निगम चुनावों में कांग्रेस ने पदों के बंटवारे को लेकर नाराजगी जाहिर की. इसके जवाब में वरिष्ठ डीएमके नेता दुराई मुरुगन ने कहा कि कांग्रेस अगर गठबंधन तोड़ भी दे तब भी उनकी पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
CAA पर बैठक से भी बनाई दूरी हालांकि यह बात सिर्फ यहीं नहीं रुकी. बीते दिनों संसोधित नागरिकता कानून के मुद्दे पर बुलाई गई एक बैठक से भी डीएमके ने किनारा कर लिया. यह DMK की ओर से एक बड़ी गलती थी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खिलाफ सामान्य रूप से एक मजबूत स्थिति में है और सीएए के विरोध में सबसे आगे रही है.
CAA के खिलाफ विपक्ष की बैठक में DMK का हिस्सा ना लेना एक शर्मनाक घटना थी और संघ सरकार के खिलाफ सबसे शक्तिशाली आंदोलन में से एक के लिए, एक वैचारिक स्तर पर, पार्टी की प्रतिबद्धता को कमजोर करने की कोशिश लगी. यहां तक कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी लगता है कि उन्हें इस बैठक में शामिल होने के लिए कांग्रेस से चल रहे अंतर्विरोधों को सामने नहीं आने देना था.
कांग्रेस के छोटे वोट शेयर की भी DMK को जरूरत!अगर तमिलनाडु के चुनावी गणित की बात करें तो आगामी विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए डीएमके के लिए कांग्रेस का साथ जरूरी है. वास्तव में इस बात की संभावना भी है कि चुनाव समय से पहले हो सकते हैं ऐसे में डीएमके के लिए करो या मरो की स्थिति है.
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