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भारत बंद: उत्तर प्रदेश में हड़ताल बेअसर
श्रम कानून में किये गये संशोधन और रेलवे समेत अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में मजदूर संगठनों के आज भारत बंद का उत्तर प्रदेश में कोई खास असर नहीं दिखाई दे रहा है ।
राजधानी लखनऊ में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको के अलावा निजी बैंक भी खुले हैं और वहां सुचारू रूप से काम हो रहा है । सरकारी कायार्लयों में भी काम काज रोज की तरह हो रहा है । सड़कों पर वाहनों की आवाजाही रोज की तरह है । हालांकि राजधानी लखनऊ समेत अन्य जिलों में सुबह से हो रही बरसात से लोग सड़कों पर कम दिखाई दे रहे हैं । लोग जरूरी काम से ही बाहर निकल रहे हैं । सरकारी और निजी बसें भी चल रही हैं और रेल को भी अभी तक कहीं से बाधित किये जाने की सूचना नहीं है ।
हालांकि वामपंथी दलों ने बंद को सफल बनाने के लिये नीति बनाई है । जिलों में हड़ताल की सफलता के लिए अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी जिला मुख्यालयों पर हड़ताल के समर्थन में बुधवार को धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय भी लिया गया है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी :सीपीआई: के राज्य सचिव गिरीश ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसानों, मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों के खिलाफ एक के बाद एक फैसले ले रही है। रेलवे विभाग तक का निजीकरण किया जा रहा है। बैंक कर्मी भी सरकार की नीतियों से परेशान हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी :माकपा: के राज्य सचिव डॉ. हीरा लाल यादव ने कहा कि श्रम कानूनों में पूंजीपतियों के पक्ष में बदलाव करके भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि उसे मजदूरों के हितों से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने दावा किया कि लाखों लोगों ने हड़ताल का समर्थन किया है ।
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