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सरकार की रणनीति नफा-नुकसान पर कम, हालात सामान्य करने पर ज्यादा
लखीमपुर खीरी की घटना के बाद इस बात पर जमकर बहस हो रही है कि वहां विपक्षी नेताओं, किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को मौके पर जाने क्यों नहीं दिया गया। अगर वे पीड़ित किसान परिवारों से मिल आते तो इससे क्या नुकसान होता। वहां सामान्य तरह से जाने देने पर क्या इतनी चर्चा मिलती, जितनी नजरबंद करने या गिरफ्तार करने से मिली। इन सवालों पर विश्लेषकों की अलग-अलग राय हो सकती है। पर, एक राय समान तौर पर उभरी है कि साढ़े चार वर्ष में पहली बार सरकार रणनीतिक तरीके से किसी बड़ी घटना को हैंडल करती नजर आई और इसमें सफल भी रही।
पूर्व मुख्य सचिव अतुल गुप्ता कहते हैं कि कई घटनाएं ऐसी होती हैं, जब सरकार को सियासी नफा-नुकसान को किनारे कर परिस्थिति को सामान्य करने के लिए सोच-समझकर निर्णय करना होता है। ऐसे में रणनीति यह होती है कि, एक-दो दिन में प्रशासन घटना की पड़ताल कर सही तथ्यों तक पहुंचकर, आवश्यक जांच कर जब लोगों के सामने पूरी स्थिति रख दे, फिर वहां किसी को जाने की इजाजत दे। इससे विपक्ष को फायदा हो रहा है या सरकार को नुकसान, यह नहीं देखा जाता।
राजनीतिशास्त्री प्रो. गोपाल प्रसाद कहते हैं, विपक्ष में रहने वाली कोई भी पार्टी हो, किसी बड़ी घटना के बाद तत्काल उस ओर भागती है। सरकार रोकेगी तो वह तथ्यों को छिपाने का इल्जाम लगाकर अपनी सियासत चमका सकेंगे। यदि सही तथ्य सामने आ जाएंगे तो फिर सियासत करने में मुश्किल होगी। जबकि सत्ता में होने पर वे भी किसी घटना के होने पर यही तरीका अपनाते रहे हैं। सरकार को स्थिति सामान्य होने पर अनावश्यक टोकाटोकी नहीं करनी चाहिए। हर किसी की प्राथमिकता शांति व अमनचैन होना चाहिए।
लखीमपुर घटना का एक कारण मंत्री का बड़बोलापन भी कई पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि खीरी की घटना में प्रारंभिक तौर पर खुफिया तंत्र की विफलता या सूचना होने पर कदम न उठाए जाने, प्रशासनिक पूर्वानुमान में चूक के साथ गृह राज्यमंत्री जैसे जिम्मेदार नेता के बड़बोलेपन के अलावा आंदोलनकारी किसानों के बीच कुछ अराजकतत्वों की पहुंच जैसे कई कारण सामने आ रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव डा. देवेश चतुर्वेदी व एडीजी कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार जैसे सीनियर अफसरों को तत्काल मौके पर भेजने का फैसला हुआ। इससे सरकार को प्रारंभिक स्तर पर सही तथ्य की जानकारी और आगे निर्णय में आसानी हुई। फिर, आग में घी का काम करने के लिए घटना के तत्काल बाद मौके पर जाने पर अड़े विपक्षी नेताओं को रोकना बहुत अहम था।
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