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समाचारदेश Alert Star Digital Team Jun 20, 2023 10:07 PM

पंजाब गुरुद्वारा एक्ट संशोधन बिल को SGPC ने नकारा, प्रधान धामी बोले- धर्म में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

पंजाब गुरुद्वारा एक्ट संशोधन बिल को SGPC ने नकारा, प्रधान धामी बोले- धर्म में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

पंजाब गुरुद्वारा एक्ट संशोधन बिल को SGPC ने नकारा, प्रधान धामी बोले- धर्म में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

पंजाब सरकार ने मंगलवार को विधासभा के विशेष सत्र में स्वर्ण मंदिर में होने वाली गुरबानी के मुफ्त प्रसारण के बिल को पास कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अब सभी चैनलों को गुरबाणी की लाइव फीड दी जाएगी।

यह फीड बिल्कुल मुफ्त होगी। वहीं, पंजाब सरकार के इस फैसले से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एस.जी.पी.सी.) के कड़ा ऐतराज जताया है। एसजीपीसी ने संशोधित बिल के पास होने को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इस मुद्दे को लेकर 26 जून को जनरल इजलास (बैठक) बुलाई है। साथ ही एसजीपीसी ने पंजाब सरकार को चेतावनी दी कि आजाद भारत में 103 साल बाद पंजाब सरकार ने हमला किया है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या जल्दी थी जो एक्ट में संशोधन कर दिया?
एसजीपीसी प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रैंस में कहा कि उनकी ओर से एक्ट में संशोधन के लिए एक कमेटी बनाई गई है, जो इस पर विचार कर रही है। धामी ने कहा कि ऐसे में सरकार को इतनी क्या जल्दबाजी थी कि एक महीना पहले ही विधानसभा में एक्ट संशोधन बिल को पास कर दिया गया। जल्दी क्या थी कि इस एक्ट में संशोधन कर दिया। यह पंजाब के इतिहास में काले शब्दों में लिखा जाएगा। धामी ने कहा कि जब गुरुद्वारा एक्ट बना था तो 1920 से लेकर 1925 तक एडहाक कमेटी बनी जिसे सिख पंथ ने स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद 1925 में एक्ट बना और एसजीपीसी को सारे अधिकार दिए गए। 1942 में एक संशोधन हुआ था, जिसमें बलदेव सिंह अकाली दल की तरफ से और अंग्रेजी हकूमत के साथ बात हुई थी कि एसजीपीसी की ओर से पहले मंजूरी मिलेगी, तभी संशोधन होगा।

'इतिहास को कलंकित करने वाला फैसला'
धामी ने कहा कि साल 1966 से पहले दो बार संशोधन हआ, क्योंकि उस समय संयुक्त पंजाब था। उस समय भी एसजीपीसी ने प्रस्ताव भेजे थे। इसके बाद जितने भी संशोधन हुए, उसमें एसजीपीसी पहले प्रस्ताव डाल कर भेजता था। यहां तक कि 2008 में हाई कोर्ट का फैसला हुआ था। उसमें साफ किया गया था कि एसजीपीसी अपने प्रचार और प्रसार के लिए पूरी तरह से अधिकार रखती है। इसके बीच हम कोई भी दखलअंदाजी नहीं करते। उस समय याचिका रद्द हुई थी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जल्दबाजी में इतिहास को कलंकित करने वाला फैसला लिया है।

यह सिख पंथ को कभी मंजूर नहीं
धामी ने कहा कि यह सिख पंथ को कभी भी मंजूर नहीं। मौजूदा सरकार जो कांटे बीज रही है। उसी को ही निकालने पड़ेंगे। एसजीपीसी एक स्वतंत्र कमेटी है। जब हरियाणा कमेटी बनी, इसके बावजूद केंद्र सरकार ने 1925 के एक्ट से गुरुद्वारा बाहर नहीं निकाले। सरकार की ओर से गुरुद्वारा में आकर कब्जे करने की नीयत से यह शुरुआत की है। एसजीपीसी पर अगर हमला किया गया तो पंथ का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि 26 जून को विशेष इजलास बुलाया गया और उसमें इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी हद में रहकर पंजाब की सेवा करें, न कि धर्म में दखलअंदाजी करें।

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