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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेशअपराध Alert Star Digital Team May 25, 2022 09:23 PM

जिला आबकारी अधिकारी की शह पर शराब माफिया कर रहे मनमानी, योगी सरकार की हो रही किरकिरी

जहां एक ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं और भ्रष्टाचार पर लगाम लगा रहे हैं वही शाहजहांपुर के जिला आबकारी अधिकारी प्रदीप दुबे आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं

जिला आबकारी अधिकारी की शह पर शराब माफिया कर रहे मनमानी, योगी सरकार की हो रही किरकिरी

                       

शाहजहांपुर।एलर्ट स्टार न्यूज़(Nandlal Singh) जहां एक ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं और भ्रष्टाचार पर लगाम लगा रहे हैं वही शाहजहांपुर के जिला आबकारी अधिकारी प्रदीप दुबे आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश के वित्तीय वर्ष 2021-2022 में सरकार को आबकारी विभाग से कुल 36208,44 करोड का मुनाफा हुआ। जिलों में कच्ची दारू का उत्पादन अधिक होने से सरकार को लाखों रुपए का नुक़सान होता है। शराब के उपभोक्ता पर मिलावट के साथ-साथ ओवर रेटिंग की भी दोहरी मार पड़ रही है। खासतौर पर ज्यादा बिकने वाले ब्रांड रॉयल चैलेंज, ब्लेंडर प्राइड, रॉयल स्टेग की बोतल पर बीस रुपये तथा अन्य ब्रांडों कम से कम ₹10 अधिक वसूल किए जा रहे हैं। कुछ दुकानों को छोड़कर अधिकतर सरकारी अंग्रेजी/देसी शराब और बीयर की दुकानों पर रेट लिस्ट नहीं लगी हुई है। जबकि नियम के अंतर्गत रेट लिस्ट लगाना आवश्यक है। शाहजहांपुर में कच्ची तथा मिलावटी शराब का अवैध कारोबार कुटीर उद्योग बन गया है। जिला आबकारी अधिकारी के कार्यालय के पास मोहल्लों में ही अवैध रूप से कच्ची शराब आबकारी विभाग की मिलीभगत से बनाई जाती है। गांव देहात में जगह-जगह खुलेआम कच्ची शराब बिक रही है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशा नुसार थानों की पुलिस लगातार अभियान चलाकर अवैध शराब बनाने बालो के खिलाफ अभियान चलाकर उनको पकड़ रही है।

 लाइसेंसी मदिरा भी व्यापक पैमाने पर मिलावट की चपेट में है। जिला आबकारी अधिकारी की मिलीभगत से शराब के शौकीनों पर मिलावट के साथ-साथ ओवर रेटिंग की भी दोहरी मार पड़ रही है। खासतौर पर ज्यादा बिकने वाले ब्रांड रॉयल चैलेंज, ब्लेंडर प्राइड, रॉयल स्टेग की बोतल पर बीस रुपये तक अधिक वसूल किए जा रहे हैं। इसी तरह क्वार्टर पर भी दस रुपये तक अधिक वसूले जा रहे हैं। वहीं, बीयर की प्रति बोतल/केन पर बीस रुपये तक की ओवर रेटिंग हो रही है। नाम ना छापने की शर्त पर "एक सरकारी शराब की दुकान के मालिक ने बताया कि आबकारी विभाग में प्रति दुकानदार ₹3000 महीना जाता है, लेकिन हम लोग किसी से कह नहीं सकते। अगर हर महीने आबकारी विभाग को पैसा नहीं जाएगा तो हम लोग दुकान नहीं चला सकते हैं। अधिकारी से आमना-सामना होने पर हम उनका विरोध नहीं कर सकते हैं"। ऐसा लगता है कि किए गए भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए जिला आबकारी अधिकारी शिकायत प्राप्त होने पर अपनी टीम के साथ कुछ एक दुकानों को चेक करके उसके खिलाफ कार्यवाही कर देते हैं, जिससे कि उन पर ज्यादा उंगली ना उठे। शराब में खतरनाक अपमिश्रण मिलने पर आईपीसी की धारा 272 का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है। इस धारा के तहत मिलावट को संज्ञेय व अजमानतीय अपराधों में रखा गया है। लेकिन, यह धारा शराब के अवैध कारोबारियों पर नहीं लगाई जाती या अगर लगाई जाती है तो बहुत ही कम लोगों पर। आबकारी विभाग इससे बचता है। कच्ची अवैध शराब बनाने वालों पर पुलिस विभाग तो अपना शिकंजा कसता है और उनकी गिरफ्तारी भी करता है परंतु आबकारी विभाग इससे बचने की कोशिश करता है

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