होम महिला सम्मेलन में शामिल भाजपा सांसद अरुण सागर ने एक राष्ट्र एक चुनाव का समर्थन करने की करी अपील
सांसद के साथ पहुंची राज्यमंत्री ने भी एक राष्ट्र एक चुनाव पर चर्चा की
शाहजहांपुर के कटरा विधानसभा क्षेत्र के आर्य महिला इंटर कालेज में एक राष्ट्र एक चुनाव के विषय पर महिला सम्मेलन किया गया। मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी के साथ भाजपा सांसद अरुण सागर कार्यक्रम में शामिल हुए। सांसद ने कार्यक्रम आई महिलाओं को एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर चर्चा कर उसके महत्व को बताया। सांसद ने कहा कि भारत के लोकतंत्र को और अधिक सशक्त, मजबूत, सुव्यवस्थित तथा प्रभावी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने अपील की है कि सभी एकजुट हों और विकसित भारत के निर्माण में "एक राष्ट्र-एक चुनाव" की पहल का पूर्ण समर्थन करें।
सांसद ने कहा कि एक देश-एक चुनाव कराने से केंद्र के राजकोष की बचत होगी। क्योंकि, हर पांच साल में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनावों का भी आयोजन किया जाता है। वहीं, देश में हर साल अलग-अलग समय पर विधासनभा चुनाव होते हैं। इसकी जिम्मेदारी भारतीय निर्वाचन आयोग की होती है। एक ही समय पर चुनाव होने पर राजकोष की बचत होगी। चुनाव के समय राज्यों में आचार संहिता लागू हो जाती है और यह परिणाम जारी होने तक लागू रहती है। ऐसे में इससे विकास परियोजनाओं में देरी होती है। एक देश-एक चुनाव में ऐसा नहीं होगा। सांसद ने कहा कि चुनाव के समय देशभर में फोर्स से लेकर विभिन्न सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। इससे उनके सरकारी काम में भी व्यवधान होता है। ऐसे में साल में एक ही बार में इस तरह की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने से शासन में निरंतरता आएगी। विभिन्न राज्यों में चुनावों के चलते राजनीतिक दल और उनके नेता और सरकारों का ध्यान चुनावों पर ही रहता है। एक साथ चुनाव होगा तो फोकस भी लोगों के लिए जनकल्याणकारी नीतियों को लागू करने पर रहेगा। अधिकारी काम पर ध्यान दे पाएंगे चुनाव की वजहों से पुलिस सहित अनेक विभागों के पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है। एकसाथ चुनाव कराए जाने से बार- बार तैनाती की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी अपने मूल दायित्यों पर फोकस कर पाएंगे। चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियां रुक जाती हैं। एक साथ चुनाव कराने से आदर्श आचार संहिता के लागू होने का समय कम होगा और इससे पॉलिसी पैरालिसिस कम होगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय बोझ में भी कमी आएगी और मैनपॉवर, उपकरणों और सुरक्षा उपायों के प्रबंधन पर भी कम खर्च होगा।
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