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राम, राशन और प्रशासन...यूपी में भाजपा की जीत के सबसे बड़े कारण
पांच राज्यों में चुनावी नतीजे आ गए हैं। इन पांचों राज्यों में सरकार गठन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। चार राज्यों में भाजपा ने अपनी सत्ता को बरकरार रखा है जबकि पंजाब में बदलाव देखने को मिला है। पांच राज्यों के चुनावी नतीजों पर ही हमने प्रभासाक्षी के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। चुनावी नतीजों को लेकर ही हमने पहला सवाल यही पूछा कि क्या जिस तरीके के नतीजे आए हैं ऐसा पहले से अनुमान था या कोई बड़ा उलटफेर हुआ है? हालांकि सवाल का जवाब देने से पहले नीरज दुबे ने इस बात का भी जिक्र किया कि काफी दिनों के बाद हम लोग एक साथ में बैठ रहे हैं। जाहिर सी बात है कि कोरोनावायरस के मामलों में कमी आई है और साथ ही साथ चुनावी खत्म हो चुके हैं। नीरज दुबे ने कहा कि चुनावी नतीजों पर चर्चा करें उससे पहले चुनाव परिणाम के बाद जिस तरीके की गतिविधि शुरू हुई है उस पर चर्चा करना जरूरी है। नीरज दुबे ने कहा कि थोड़ी सी चिंता जरूर होती है क्योंकि जो हमारे संवैधानिक निकाय हैं उन पर जो सवाल उठाए जाते हैं, यह गलत है। दरअसल, ममता बनर्जी ने हाल में ही कहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत जनादेश नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने ईवीएम पर सवाल उठाए थे।
इसी को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि अभी आज से ठीक कुछ महीने पहले आपको एकतरफा जीत मिली तो यह ईवीएम सही था और उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत हो गई तो ईवीएम कैसे गलत हो सकता है। उन्होंने कहा कि लगातार ममता बनर्जी तीसरी बार इसी ईवीएम की बदौलत मुख्यमंत्री बनी हैं। फिर यह कैसे गलत हो सकता है। हमारे चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा वैश्विक रूप से ज्यादा है। इसे धूमिल करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि हमारे चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा है और हम ही उस प्रतिष्ठा को गिराएंगे तो यह लोकतंत्र के हित में नहीं है। इन पांच राज्यों के चुनाव में आयोग की ओर से दिन-रात मेहनत की गई है। आप एक सवाल की वजह से सभी की मेहनत पर पानी फेरने की कोशिश कर रही हैं। चुनावी परिणाम की बात करते हुए नीरज दुबे ने कहा कि जिस तरीके से पांच राज्यों में चुनावी नतीजे आए हैं, वह अपेक्षा के अनुरूप ही रहे। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही ऐसा लग रहा था कि 4 राज्यों में भाजपा बनी रहेगी। गोवा को लेकर कांटे की टक्कर जरूर बताई जा रही थी लेकिन वहां भी पार्टी ने एकतरफा जीत हासिल की है। वहीं पंजाब को लेकर पहले ही कहा जा रहा था कि कांग्रेस इस बार कमजोर हो चुकी है और वहां आम आदमी पार्टी की सरकार बन सकती है और ऐसा ही कुछ पंजाब में हुआ है।
उत्तर प्रदेश की बात करते हुए नीरज दुबे ने भाजपा की जीत के बड़े कारण भी बताएं। दरअसल, नीरज दुबे खुद चुनावी कवरेज के लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में गए थे और उन्होंने जो कुछ भी अनुभव किया प्रभासाक्षी के कार्यक्रम में साझा भी किया। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम आ चुके हैं जैसा कि दिख रहा है कि समाजवादी पार्टी के वोट प्रतिशत में काफी इजाफा हुआ है। बीजेपी के भी वोट प्रतिशत में इजाफा जरूर हुआ है लेकिन सीटें कम हो गई है। उनका उत्तर प्रदेश में महिला वोटर बीजेपी के साथ थीं। अगर घर का पुरुष बीजेपी के खिलाफ भी है, बावजूद इसके उस घर की महिला बीजेपी के पक्ष में थीं। यह स्थिति पूरी तरीके से उत्तर प्रदेश में स्पष्ट थी। समाजवादी पार्टी की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जो उत्तर प्रदेश के मुस्लिम वोटर थे, उनका वोट सपा को एकतरफा गया है। इसके अलावा जो लोग बेरोजगारी की बात करते हैं, उन्होंने भी समाजवादी पार्टी के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी की नाराजगी और पेंशन स्कीम की वजह से सपा को अधिकारियों के भी वोट मिले हैं। भाजपा को राष्ट्रवाद और कानून व्यवस्था के नाम पर वोट पड़े हैं। किसान आंदोलन उत्तर प्रदेश में कोई बड़ा मुद्दा नहीं था। राशन और प्रशासन के दम पर ही भाजपा सत्ता में लौटी है।
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