होम प्रलय के प्रहार से भी मुक्त है महाकाल नगरी ,PM मोदी ने बताई उज्जैन की खासियत

समाचारदेश Alert Star Digital Team Oct 11, 2022 09:17 PM

प्रलय के प्रहार से भी मुक्त है महाकाल नगरी ,PM मोदी ने बताई उज्जैन की खासियत

प्रलय के प्रहार से भी मुक्त है महाकाल नगरी ,PM मोदी ने बताई उज्जैन की खासियत

प्रलय के प्रहार से भी मुक्त है महाकाल नगरी ,PM मोदी ने बताई उज्जैन की खासियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार शाम 856 करोड़ रुपये की लागत वाली भव्य और दिव्य महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर विकास परियोजना 'श्री महाकाल लोक' (Mahakal Lok) के पहले चरण का उद्घाटन किया। मध्य प्रदेश की उज्जैन स्मार्ट सिटी के तहत 856 करोड़ रुपये की यह परियोजना 2017 में शुरू हुई थी।पीएम मोदी ने 'श्री महाकाल लोक' के लोकार्पण के बाद इसकी विशेषताओं के साथ उज्जैन की खासियत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 'महाकाल लोक' में लौकिक कुछ भी नहीं है। शंकर के सानिध्य में साधारण कुछ भी नहीं है। सब कुछ अलौकिक है, असाधारण है, अविस्मरणीय है और अविश्वसनीय है। महकाल नगरी प्रलय के प्रहार से भी मुक्त है। यही वो जगह है जहां भगवान कृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की थी। उज्जैन भारत की आस्था का केंद्र रहा है।मोदी ने कहा कि हमारी तपस्या और आस्था से जब महाकाल प्रसन्न होते हैं तो उनके आशीर्वाद से ही ऐसे ही भव्य स्वरूप का निर्माण होता है और जब महाकाल का आशीर्वाद मिलता है तो काल की रेखाएं मिट जाती हैं।उज्जैन के छण-छण में, पल-पल में इतिहास सिमटा हुआ है। कण-कण में आध्यात्म समाया हुआ है और कोने-कोने में ईश्वरीय ऊर्जा संचारित हो रही है। उज्जैन ने हजारों वर्षों तक भारत की संपन्नता और समृद्धि का, ज्ञान और गरिमा और साहित्य का नेतृत्व किया है।
उज्जैन वो नगर है, जो हमारी पवित्र सात पुरियों में से एक गिना जाता है। ये वो नगर है, जहां भगवान कृष्ण ने भी आकर शिक्षा ग्रहण की थी। उज्जैन ने महाराजा विक्रमादित्य का वो प्रताप देखा है, जिसने भारत के नए स्वर्णकाल की शुरुआत की थी।प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे शास्त्रों में एक वाक्य है- शिवम् ज्ञानम् इसका अर्थ है शिव ही ज्ञान है और ज्ञान ही शिव है। शिव के दर्शन में ही ब्रह्मांण्ड का सर्वोच्च दर्शन है। जो शिव 'सोयं भूति विभूषण:' हैं। अर्थात, भस्म को धारण करने वाले हैं, वो 'सर्वाधिप: सर्वदा' भी है। अर्थात, वो अनश्वर और अविनाशी भी हैं। इसलिए, जहां महाकाल हैं, वहां कालखंडों की सीमाएं नहीं हैं।महाकाल मंदिर के नवनिर्मित कॉरिडोर में 108 स्तंभ बनाए गए हैं, 910 मीटर का ये पूरा महाकाल लोक इन स्तंभों पर टिका है। महाकवि कालिदास के महाकाव्य मेघदूत में महाकाल वन की परिकल्पना को जिस सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है, सैकड़ों वर्षों के बाद उसे यहां साकार किया गया है।'महाकाल लोक' कॉरिडोर पुरानी रुद्र सागर झील के चारों और फैला हुआ है। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के आसपास के क्षेत्र के पुनर्विकास की परियोजना के तहत रुद्र सागर झील को पुनर्जीवित किया गया है।कॉरिडोर के लिए दो भव्य प्रवेश द्वार- नंदी द्वार और पिनाकी द्वार बनाए गए हैं। यह कॉरिडोर मंदिर के प्रवेश द्वार तक जाता है तथा रास्ते में मनोरम दृश्य देखने को मिलते हैं। दोनों भव्य प्रवेश द्वार, बलुआ पत्थरों से बने जटिल नक्काशीदार 108 अलंकृत स्तंभों की एक आलीशान स्तम्भावली, फव्वारों और शिव पुराण की कहानियों को दर्शाने वाले 50 से अधिक भित्ति-चित्रों की एक श्रृंखला 'महाकाल लोक' की शोभा बढ़ाएंगे।

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