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समाचारविदेश Alert Star Digital Team Jul 14, 2026 11:13 AM

US-Iran War: अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज, दोनों देशों के जवाबी हमलों से बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष और अधिक गंभीर होता जा रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमलों का दावा किया है। लगातार बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है।

US-Iran War: अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज, दोनों देशों के जवाबी हमलों से बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष और अधिक गंभीर होता जा रहा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों पर बड़े हमलों का दावा किया है। लगातार बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, 13 जुलाई की रात ईरान के खिलाफ करीब पांच घंटे तक सैन्य अभियान चलाया गया। अमेरिका का दावा है कि इस दौरान बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास सहित कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों की क्षमता को कमजोर करना था। अमेरिका ने यह भी बताया कि मध्य पूर्व में उसके 50 हजार से अधिक सैनिक तैनात हैं।

दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन स्थित अल-जुफैर बेस पर मौजूद हथियार भंडार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेंटर और अमेरिकी सैनिकों से जुड़े एक भवन को निशाना बनाया। इसके साथ ही IRGC ने अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया है।

बढ़ते सैन्य टकराव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ नजर आ रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 85 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। तेल की कीमतें पिछले एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंचने से वैश्विक फ्यूल सप्लाई, समुद्री व्यापार और महंगाई को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

अमेरिका-ईरान युद्ध की प्रमुख बातें

अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर करीब पांच घंटे तक ऑपरेशन चलाया। इस दौरान बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना के अनुसार, अभियान में डिफेंस सिस्टम, मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक क्षमताओं को भी टारगेट किया गया। वहीं, मध्य पूर्व में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर तैनात हैं।

ईरान की ओर से IRGC ने बहरीन के अल-जुफैर बेस पर जवाबी हमले का दावा किया है। इसके अलावा, ईरान ने अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने और दो सुपर ऑयल टैंकरों पर हमला करने का भी दावा किया। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने हॉर्मुज क्षेत्र में अपने दो तेल टैंकरों पर हमले का आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र में भी ईरान ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों को कमजोर करने का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले शांति समझौते पर सहमति बनने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, हॉर्मुज क्षेत्र में दो जहाजों पर हमले के बाद हालात फिर बिगड़ गए। इसके बाद अमेरिका की जवाबी कार्रवाई के साथ दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर तेज हो गया।

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