होम UP News: योगी सरकार में चकबंदी व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 8 साल में 3,192 गांवों में पूरी हुई प्रक्रिया; 21 लाख से ज्यादा मुकदमों का निस्तारण
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में चकबंदी व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। चकबंदी निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 की तुलना में 2025 तक चकबंदी प्रक्रिया पूरी करने वाले गांवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही चकबंदी न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण और भूमि विवादों से जुड़े वादों के निस्तारण में भी प्रगति हुई है।
इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य किसानों की भूमि से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करना, राजस्व अभिलेखों को दुरुस्त करना और चकबंदी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिकॉर्ड संबंधित तहसीलों तक समय से पहुंचाना है। विभागीय आंकड़े चकबंदी व्यवस्था में हुए बदलावों की तस्वीर पेश करते हैं।
चकबंदी निदेशालय के अनुसार, वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश के 1,925 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया पूरी हुई थी। वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3,192 गांव हो गई। इन गांवों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित अभिलेख तहसीलों को वापस किए गए।
चकबंदी पूरी होने से भूमि संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और किसानों से जुड़े राजस्व कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। सरकार की ओर से इस व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि भूमि अभिलेखों से जुड़े कामकाज में समयबद्धता लाई जा सके।
चकबंदी न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण के मोर्चे पर भी प्रगति दर्ज की गई है। निदेशालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 में 12.55 लाख से अधिक वादों के निस्तारण की स्थिति थी, जबकि वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 21.12 लाख से अधिक हो गया।
विभाग के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में कुल 21 लाख 12 हजार 784 वादों का निस्तारण किया गया। भूमि विवादों से जुड़े मामलों का निपटारा किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ऐसे विवादों का असर भूमि के इस्तेमाल और राजस्व अभिलेखों से जुड़े कार्यों पर पड़ सकता है।
चकबंदी व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण पर भी ध्यान दिया गया है। वर्ष 2017 में इस श्रेणी में कंप्यूटरीकरण की स्थिति शून्य थी, जबकि वर्ष 2025 तक कुल 531 न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण किया गया।
इनमें उप संचालक चकबंदी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी और चकबंदी अधिकारी के न्यायालयों के साथ 180 सहायक चकबंदी अधिकारी न्यायालय भी शामिल हैं। न्यायालयों को कंप्यूटरीकृत करने का उद्देश्य कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाना और न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक का उपयोग बढ़ाना है।
चकबंदी प्रक्रिया के नवप्रसार के तहत पिछले आठ वर्षों में कुल 1,302 गांवों को शामिल किया गया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में इस श्रेणी में 2,468 गांवों की स्थिति दर्ज थी, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 1,302 रही।
निदेशालय के आंकड़ों में इन गांवों को आठ वर्षों के दौरान चकबंदी क्रियाओं में शामिल किए गए गांवों के रूप में दर्शाया गया है। इस तरह प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने, न्यायालयों के कंप्यूटरीकरण और वादों के निस्तारण पर काम किया गया है। इन कदमों का उद्देश्य भूमि संबंधी मामलों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना और किसानों से जुड़े राजस्व कार्यों को व्यवस्थित करना है।
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