होम UP Startup Policy 2026: योगी सरकार का बड़ा प्लान! 24 हजार से ज्यादा स्टार्टअप, युवाओं को मिल रही करोड़ों की मदद
उत्तर प्रदेश में युवाओं को नौकरी तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला उद्यमी बनाने के लिए योगी सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
उत्तर प्रदेश में युवाओं को नौकरी तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला उद्यमी बनाने के लिए योगी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सरकार की नीतियों, वित्तीय सहायता और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से प्रदेश देश के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। प्रदेश में भारत सरकार के पास पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या 24 हजार से अधिक हो गई है, जबकि 3,500 से ज्यादा स्टार्टअप 'स्टार्ट-इन-यूपी' के तहत पंजीकृत हैं। सरकार का लक्ष्य नवाचार, तकनीकी विकास और उद्यमशीलता को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख स्टार्टअप केंद्रों में शामिल करना है।
योगी सरकार ने प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए 15 जुलाई 2020 को उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020 अधिसूचित की थी। इस नीति के तहत 10 हजार स्टार्टअप का इकोसिस्टम तैयार करने और प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कम से कम 100 इन्क्यूबेटर्स का नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था।
स्टार्टअप क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों और युवाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए सरकार ने 9 नवंबर 2022 को नीति में पहला संशोधन किया। इसका उद्देश्य नए विचारों को प्रोत्साहित करना और युवाओं को अपना उद्यम शुरू करने के लिए बेहतर सुविधाएं तथा अवसर उपलब्ध कराना था।
उत्तर प्रदेश सरकार स्टार्टअप इकोसिस्टम को केवल पंजीकरण की संख्या तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक और अनुसंधान आधारित उद्यमों को भी बढ़ावा दे रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में आठ अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
इनमें मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होकर संचालित हो रहे हैं।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, मेडिटेक, ड्रोन, 5G/6G, दूरसंचार, ब्लॉकचेन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सात अन्य सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी दी गई है। इन केंद्रों से युवाओं, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को नई तकनीकों पर आधारित स्टार्टअप विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्टार्टअप नीति-2020 के पांच वर्ष पूरे होने के बाद सरकार ने बदलती तकनीकी और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 जुलाई 2026 को नई स्टार्टअप नीति अधिसूचित की। इसके साथ ही स्टार्टअप, इन्क्यूबेशन और नवाचार से जुड़ी गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिली।
प्रदेश में डीप-टेक इकोसिस्टम को मजबूत करने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए नोएडा और लखनऊ में 'यू-हब (डीप-टेक हब)' विकसित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई है। इन हब के माध्यम से तकनीकी नवाचार, अनुसंधान, निवेश और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की योजना है।
योगी सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं के तहत स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को वित्तीय मदद दी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक विभिन्न श्रेणियों में कुल 3,833.525 लाख रुपये यानी लगभग 38.34 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई है।
इसमें 150 स्टार्टअप्स को भरण-पोषण भत्ते के रूप में 123.14 लाख रुपये, 440 स्टार्टअप्स को सीड कैपिटल और मार्केटिंग सहायता के लिए 1,457.425 लाख रुपये तथा 111 स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप विकास के लिए 539.86 लाख रुपये दिए गए हैं।
इसके अलावा 59 इन्क्यूबेटर्स को परिचालन व्यय के लिए 1,347.54 लाख रुपये और 16 इन्क्यूबेटर्स को पूंजीगत अनुदान के रूप में 365.56 लाख रुपये की सहायता दी गई है।
27 अगस्त 2026 को आयोजित 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक और नौ इन्क्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रोत्साहन वितरित किए थे। इसी अवसर पर 'यूपी स्टार्टअप मिशन' वेबसाइट भी शुरू की गई, ताकि उद्यमियों को योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करने में आसानी हो।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को शुरुआती चरण में आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना और उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करना है।
उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिला उद्यमियों की भागीदारी भी बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, DPIIT में पंजीकृत स्टार्टअप्स में 11 हजार से अधिक महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप शामिल हैं। इसे प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उद्यमशीलता के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के 48 स्टार्टअप्स को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के माध्यम से वित्तपोषण मिल रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 88 सरकारी मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स काम कर रहे हैं, जो सूचना प्रौद्योगिकी, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि और सामाजिक प्रभाव जैसे क्षेत्रों में नए उद्यमों को मार्गदर्शन तथा तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
योगी सरकार की नीतियों, वित्तीय सहायता और तकनीकी संस्थानों के साथ साझेदारी से उत्तर प्रदेश ने स्टार्टअप क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है। DPIIT की वार्षिक स्टार्टअप रैंकिंग में प्रदेश को 'टॉप परफॉर्मर' श्रेणी मिलना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
सरकार का लक्ष्य मौजूदा स्टार्टअप नेटवर्क को और मजबूत बनाना तथा डीप-टेक, नवाचार और उद्यमशीलता के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है, ताकि प्रदेश के युवा नए व्यवसाय शुरू कर सकें और रोजगार के अवसर पैदा करने में योगदान दें।
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