होम सिविल कोड लागू करे सरकार, मुसलमानों को होगा फायदा;

समाचारदेश Alert Star Digital Team Jul 13, 2023 10:42 PM

सिविल कोड लागू करे सरकार, मुसलमानों को होगा फायदा;

सिविल कोड लागू करे सरकार, मुसलमानों को होगा फायदा;

सिविल कोड लागू करे सरकार, मुसलमानों को होगा फायदा;

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने गुरुवार को एक बार फिर से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि केवल केंद्र सरकार ही इसे लागू करने काम कर सकती है।

राज्यपाल ने कहा, “केंद्र को सबसे पहले यूसीसी के उचित कार्यान्वयन के लिए मार्ग प्रशस्त करना होगा। अनुच्छेद 44 कहता है कि समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन सुनिश्चित करना प्रत्येक राज्य की जिम्मेदारी है। इस पर भी आपत्तियां उठ सकती हैं लेकिन मैं बहुत पहले से कह रहा हूं कि भले ही अनुच्छेद 44 एक निदेशक सिद्धांत है और सरकार को उचित कार्यान्वयन के लिए एक व्यवस्था के रूप में खड़ा है।" खान ने ''समान नागरिक संहिता-समय की जरूरत?'' पर एक सेमिनार को संबोधित करते हुए यह बात कही। केरल के राज्यपाल ने आगे कहा, “मेरी राय के अनुसार, हमारे देश में कानून संहिताबद्ध नहीं है बल्कि घोषणात्मक है और विवाह और गोद लेने जैसे विषय धार्मिक कानूनों पर आधारित होने चाहिए। लेकिन अंग्रेजों ने कभी इस बात पर जोर नहीं दिया कि ये धार्मिक कानून क्या होंगे।”

केरल के राज्यपाल तीन तलाक जैसी प्रथाओं के खात्मे के मुखर समर्थन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने शाह बानो मामले से निपटने के लिए राजीव गांधी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने शाह बानो के लिए गुजारा भत्ता के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसे राजीव गांधी की कैबिनेट ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के साथ दरकिनार कर दिया था। सरकार के कानून ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कमजोर कर दिया और मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को तलाक के बाद अपने पूर्व पतियों से गुजारा भत्ता पाने के अधिकार को केवल 90 दिनों तक सीमित कर दिया।

राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि यूसीसी का एकमात्र मकसद सभी के लिए एक समान कानून है। खान ने ट्रिपल तलाक जैसे अन्य प्रासंगिक कानूनों को सामने लाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप 2019 में इसे लागू किए जाने के बाद से मुस्लिम महिलाओं के बीच तलाक की दर में 69% की गिरावट आई है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इसको अच्छे से लागू किया जाएगा। यूसीसी से मुसलमानों को फायदा होगा।

केरल के राज्यपाल ने आगे कहा, “आज की स्थिति इतनी गंभीर है कि, यदि अदालत मेरे पक्ष में आदेश देती है तो मुझे खुशी होगी, लेकिन यदि नहीं तो लोग आरोप लगाते हैं कि उनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। शाह बानो केस की तरह कोई भी आंदोलन खड़ा कर सकता है। ट्रिपल तलाक फैसले में, अदालत ने बताया था कि ट्रिपल तलाक की प्रथा अवैध और असंवैधानिक थी और कुरान में वास्तव में जो कहा गया था उसका भी उल्लंघन था। लोकसभा में यूसीसी 2017 में पारित हो गया था लेकिन राज्यसभा में विपक्षी नेताओं ने इसे बहुमत से पास नहीं होने दिया। विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने यूसीसी के कार्यान्वयन का पुरजोर विरोध भी नहीं किया और केवल संसद से वाकआउट किया। जब तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया गया था, तो मुसलमानों को डर था कि उनकी पहचान खत्म हो जाएगी, लेकिन वास्तव में जो हुआ वह मुसलमानों के बीच तलाक की दर में 69% की गिरावट थी। इससे न केवल महिलाओं को बल्कि मुस्लिम बच्चों को भी मदद मिली।”

केरल के राज्यपाल ने उन लोगों की भी आलोचना की जिन्होंने दावा किया था कि यदि यूसीसी लागू किया जाता है, तो मुसलमान शादी नहीं कर पाएंगे और अपने शवों को दफन नहीं कर पाएंगे और यह मुसलमानों पर जबरदस्ती थोपा जाने वाला एक हिंदू कानून है। इन आरोपों पर उन्होंने कहा, “1937 का मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, अनुच्छेद 370 के कारण कश्मीर के लिए लागू नहीं था, लेकिन कानून के अनुसार कश्मीर के मुसलमान अभी भी मुसलमान थे। गोवा में यूसीसी पहले ही लागू हो चुका है लेकिन यहां के लोगों का कहना है कि अगर यूसीसी लागू हुआ तो मुसलमान न तो शादी कर पाएंगे और न ही अपने शव को दफना पाएंगे। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि यह एक हिंदू कानून है जो मुसलमानों पर थोपा जा रहा है। लेकिन हिंदू कानून हिंदुओं पर भी लागू नहीं होता है और उनके धर्म में तलाक की कोई अवधारणा नहीं है।

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)