होम UP Land Records: यूपी में जमीन के रिकॉर्ड में बड़ा बदलाव! 65 लाख वरासत ऑनलाइन, 98% भू नक्शे खतौनी से जुड़े
उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ी प्रगति का दावा किया है।
उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े दस्तावेजों को डिजिटल बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ी प्रगति का दावा किया है। राजस्व विभाग के अनुसार, प्रदेश में रियल टाइम खतौनी व्यवस्था का 99.86 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही भूमि अभिलेखों को अपडेट करने और राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। वहीं, 85 प्रतिशत से अधिक गाटों में अंश निर्धारण का काम पूरा हो गया है। प्रदेश में 98 प्रतिशत भू नक्शों को खतौनी से जोड़ा जा चुका है। सरकार का मानना है कि इन डिजिटल सुविधाओं से जमीन के रिकॉर्ड को अपडेट रखने और लोगों को राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने में सहूलियत मिलेगी।
राजस्व विभाग के अनुसार, वर्ष 2017 से पहले खतौनी तैयार करने की व्यवस्था छह साल के रोस्टर पर आधारित थी। उस समय कई प्रक्रियाएं ऑफलाइन होती थीं, जिसके कारण लोगों को जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे।
योगी सरकार ने भूमि अभिलेखों और राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण पर ध्यान दिया है। रियल टाइम खतौनी व्यवस्था के माध्यम से जमीन के रिकॉर्ड को समय के अनुसार अपडेट करने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बन सके।
राजस्व विभाग ने खतौनी को अधिक सुरक्षित और प्रमाणिक बनाने के लिए क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा शुरू की है। इन सुविधाओं से दस्तावेजों की जांच और सत्यापन आसान हो सकता है। साथ ही, डिजिटल व्यवस्था के जरिए भूमि अभिलेखों तक पहुंच बनाना भी सुविधाजनक होने की उम्मीद है।
विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था से जमीन से जुड़े रिकॉर्ड के रखरखाव और राजस्व संबंधी कामकाज में पहले की तुलना में अधिक पारदर्शिता आएगी।
भूमि स्वामी की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों के नाम जमीन का रिकॉर्ड दर्ज कराने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। राजस्व विभाग के मुताबिक, अब तक 65 लाख से ज्यादा वरासत ऑनलाइन दर्ज हो चुकी हैं।
पहले इस प्रक्रिया के लिए लोगों को ऑफलाइन तरीके से आवेदन और अन्य औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थीं, जिसमें समय और मेहनत लगती थी। ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए वरासत दर्ज कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रयास किया गया है।
राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 85 प्रतिशत से अधिक गाटों का अंश निर्धारण पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा उपलब्ध भू नक्शों और शजरों का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण किया गया है। वहीं, 98 प्रतिशत भू नक्शों को खतौनी से जोड़ा जा चुका है।
विभाग वर्ष 2021 से ई-खसरा पड़ताल ऐप के जरिए डिजिटल खसरा भी तैयार कर रहा है। इस व्यवस्था के माध्यम से खेतों से जुड़े विवरण को डिजिटल रूप में दर्ज करने में मदद मिल रही है। भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण से रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने और राजस्व सेवाओं की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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