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समाचारविदेश Alert Star Digital Team Dec 25, 2025 07:08 PM

17 साल बाद लंदन से लौटते ही तारिक रहमान ने भरी हुंकार, बोले- शहीदों के खून का बदला ऐसे चुकाएंगे, उस्मान हादी का भी किया जिक्र

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान गुरुवार (25 दिसंबर, 2025) को 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद ब्रिटेन से स्वदेश वापस लौट आए हैं।

17 साल बाद लंदन से लौटते ही तारिक रहमान ने भरी हुंकार, बोले- शहीदों के खून का बदला ऐसे चुकाएंगे, उस्मान हादी का भी किया जिक्र

ढाका: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान गुरुवार (25 दिसंबर, 2025) को 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद ब्रिटेन से स्वदेश वापस लौट आए हैं। उनकी यह वापसी ऐसे नाजुक वक्त में हुई है जब कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद पूरा बांग्लादेश अशांति और राजनीतिक अस्थिरता की आग में जल रहा है। ढाका पहुंचते ही रहमान ने देश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से संपर्क साधा और अपनी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए उनका धन्यवाद किया।

शहीदों के खून का बदला चुकाने का बताया प्लान

ढाका में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने उस्मान हादी की हत्या और देश के हालातों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि हादी केवल देश के लोगों को उनके आर्थिक अधिकार वापस दिलाना चाहते थे। अपने संबोधन में उन्होंने 1971 और 2024 के संघर्षों को याद करते हुए एक बड़ा बयान दिया। तारिक रहमान ने कहा, "1971 और 2024 में शहीद हुए लोगों के खून का बदला चुकाने के लिए, हमें उस बांग्लादेश का निर्माण करना होगा, जिसकी उन्होंने कल्पना की थी." उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद हिंसा नहीं, बल्कि उस सपनों के बांग्लादेश को बनाना है जिसके लिए लोगों ने जान दी।

सभी धर्मों के लिए सुरक्षित बांग्लादेश का वादा

तारिक रहमान ने अपने भाषण में बार-बार शांति और सांप्रदायिक सौहार्द पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "बांग्लादेश ऐसा देश है जहां मुसलमान, हिंदू, बौद्ध और ईसाई सभी समान रूप से रहते हैं. हम एक सुरक्षित बांग्लादेश का निर्माण करना चाहते हैं. एक ऐसा देश जहां कोई भी महिला, पुरुष या बच्चा सुरक्षित रूप से घर से निकले तो सुरक्षित रूप से वापस लौट सके." उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे 1971 के युद्ध, 1975 के विद्रोह और 1990 के जन आंदोलन की तरह ही एकजुट होकर अब राष्ट्र निर्माण में लग जाएं ताकि खोया हुआ लोकतांत्रिक ढांचा वापस मिल सके।

जमात-ए-इस्लामी से मिलेगी कड़ी टक्कर

राजनीतिक पंडितों के अनुसार, तारिक रहमान की वापसी बीएनपी के लिए संजीवनी का काम कर सकती है। गौरतलब है कि अंतरिम सरकार ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए अवामी लीग को भंग कर दिया है, जिससे मैदान खाली है। हालांकि, कभी बीएनपी की सहयोगी रही जमात-ए-इस्लामी अब उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी है और देश के बिखरे हुए राजनीतिक परिदृश्य में अपना प्रभाव जमा रही है। ऐसे में तारिक रहमान के सामने पार्टी को फिर से खड़ा करने की बड़ी चुनौती होगी।

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