होम BJP और Election Commission पर सौरव दास का बड़ा हमला, बोले- ‘सत्ता हमेशा के लिए नहीं होती’
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग को लेकर निशाना साधा है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार को यह याद रखना चाहिए कि सत्ता हमेशा के लिए नहीं होती और सरकार को सत्ता का इस्तेमाल जनता की सेवा के लिए करना चाहिए। सौरव दास ने यह टिप्पणी 28 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की। उनके बयान की रिपोर्ट भी इसी दिन प्रकाशित हुई है।
सौरव दास ने एक्स पर लिखा, 'आज मुख्य चुनाव आयुक्त की गैर-कानूनी कार्रवाइयों के बारे में पूछा जा रहा है, तो पूरा भाजपा का पूरा सिस्टम इतिहास का पाठ पढ़ा रहा है. किसी भी सरकार को यह याद रखना चाहिए कि सत्ता सेवा करने के लिए होती है और सत्ता हमेशा के लिए नहीं होती. ऐसा न सोचने वाली सरकार खत्म होने की ओर बढ़ने लगती है.'
उनकी यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रही राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच सामने आई है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर किए जाने का उल्लेख करते हुए दास ने न्यायपालिका और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया रखी।
सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, 'मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की जा रही हैं. हालांकि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब पिछली बार लोगों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था तो क्या हुआ था. सु्प्रीम कोर्ट ने तय किया है कि चाहे जैसे भी, चुनाव से कुछ महीने पहले बंगाल में एसआईआर हो.'
उन्होंने लिखा, 'जब बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम हटाए जाने को नजरअंदाज करना संभव नहीं हुआ तो जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने असाधारण टिप्पणी की, जो इस बार वोट नहीं दे पाए, वो अगली बार दे सकते हैं.'
सौरव दास की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और अदालतों में दाखिल याचिकाओं को लेकर लगातार राजनीतिक बहस जारी है।
सौरव दास ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के तौर पर अदालतों को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करने दी जानी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही का फैसला केवल अदालतों के जरिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'अदालतें संवैधानिक संस्थाएं हैं, लिहाजा ज्ञानेश के खिलाफ जितनी याचिकाएं आ रही हैं, उन्हें सुनने दीजिए. लेकिन ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही को तय करने के मामले को हम कोर्ट के पास नहीं ले जाएंगे. यह फैसला लोग तय करेंगे.'
दास का बयान ऐसे समय आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में कई याचिकाओं के साथ-साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर भी सार्वजनिक बहस तेज है।
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