होम One Nation One Election पर कांग्रेस को Kiren Rijiju की चिट्ठी, खरगे से बोले- संसद में विधेयकों का रास्ता न रोकें!
‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर इस प्रस्तावित कानून पर सरकार का पक्ष रखा है।
‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर इस प्रस्तावित कानून पर सरकार का पक्ष रखा है। रिजिजू ने दावा किया कि सरकार ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ बातचीत करने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन पार्टी की ओर से चर्चा के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई। उनके मुताबिक, कांग्रेस से बातचीत आगे नहीं बढ़ने के बाद सरकार ने दूसरे राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श किया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे पत्र में संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए सहयोग मांगा है। उन्होंने कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पारित कराने की प्रक्रिया में बाधा न डाली जाए। सरकार का जोर जरूरी विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने पर है, जबकि एक देश, एक चुनाव के प्रस्ताव पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना भी अहम माना जा रहा है।
‘एक देश, एक चुनाव’ का अर्थ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था लागू करना है। इस प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी कामकाज और नीतिगत फैसलों पर पड़ने वाला असर कम किया जा सकता है। इसके अलावा, चुनावी प्रक्रिया में बार-बार लगने वाले संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्था के इस्तेमाल को भी कम करने की उम्मीद जताई जाती है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर संवैधानिक और संघीय ढांचे से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं। आलोचकों के बीच इस बात पर चर्चा होती रही है कि एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था लागू करने के लिए संविधान और मौजूदा चुनावी प्रक्रिया में किस तरह के बदलाव करने पड़ सकते हैं।
एक देश, एक चुनाव से संबंधित विधेयकों की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित की गई है। इस समिति की प्रक्रिया और राजनीतिक दलों के बीच विचार-विमर्श को प्रस्तावित कानून के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार इस व्यवस्था को आगे बढ़ाना चाहती है, लेकिन इसे लेकर व्यापक राजनीतिक चर्चा और सहमति का सवाल अब भी अहम बना हुआ है।
किरण रिजिजू का खरगे को पत्र लिखना इसी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अब देखना होगा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस प्रस्ताव पर सरकार के साथ बातचीत के लिए क्या रुख अपनाते हैं और संसद में इससे जुड़े विधेयकों पर आगे किस तरह की चर्चा होती है।
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