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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Aug 22, 2026 12:06 PM

Akhilesh Yadav के चवन्नी बयान पर मायावती का पलटवार, बोलीं- Jat समाज से तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चवन्नी वाले बयान को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। अब बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती भी इस विवाद में उतर आई हैं और..

Akhilesh Yadav के चवन्नी बयान पर मायावती का पलटवार, बोलीं- Jat समाज से तुरंत माफी मांगें सपा प्रमुख

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 'चवन्नी' वाले बयान को लेकर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। अब बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती भी इस विवाद में उतर आई हैं और उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी के समर्थन में अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने सपा प्रमुख के बयान को अहंकारी और अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि इससे सिर्फ चौधरी चरण सिंह के परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे जाट समाज का अपमान हुआ है।

बसपा प्रमुख ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव के बयान और समाजवादी पार्टी की राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा मुखिया को अपने बयान के लिए राष्ट्रीय लोकदल और उसके नेता के साथ-साथ चौधरी चरण सिंह के परिवार तथा पूरे जाट समाज से तत्काल माफी मांगनी चाहिए।

'चवन्नी से रुपया बना दिया' बयान पर मायावती का हमला

मायावती ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव के बयान का उल्लेख करते हुए लिखा, 'जैसा कि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है.'

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी के लिए अखिलेश यादव को संबंधित पार्टी और उसके नेता से माफी मांगने के अलावा चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने के लिए पूरे जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए।

मायावती ने सपा की राजनीतिक कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी का रवैया लंबे समय से अपने विरोधियों के साथ-साथ सहयोगी दलों के प्रति भी राजनीतिक संकीर्णता और जातिवादी द्वेष से प्रभावित रहा है। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से कई मौकों पर इसका राजनीतिक लाभ बीजेपी को मिला और धर्मनिरपेक्ष ताकतें कमजोर हुईं।

पुराने सपा-बसपा गठबंधन का भी किया जिक्र

मायावती ने अपने बयान में सपा और बसपा के पुराने गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सपा के कथित अहंकारी रवैये के कारण 1993 में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के साथ बना सपा-बसपा गठबंधन जल्द ही टूट गया था। इसके बाद 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ, जिसका मायावती ने अपने खिलाफ हत्या के षडयंत्र के रूप में उल्लेख किया।

बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि बाद में अखिलेश यादव के साथ लोकसभा चुनाव के दौरान सपा-बसपा का गठबंधन हुआ था। उनके मुताबिक चुनाव परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आने के बाद अखिलेश यादव के कथित अहंकारी और स्वार्थी रवैये के चलते यह गठबंधन भी ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका।

मायावती ने Akhilesh के PDA फॉर्मूले पर भी साधा निशाना

मायावती ने अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार सपा प्रमुख PDA में 'P' का अलग-अलग अर्थ बताते हैं और कभी इसे पिछड़ा वर्ग तो कभी पंडितों के हित से जोड़ते हैं।

बसपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सपा पिछड़े वर्गों में अपनी जाति के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और अपरकास्ट समाज, विशेष रूप से ब्राह्मण समाज की हितैषी नहीं रही है। उन्होंने सपा की पिछली सरकारों पर दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और ब्राह्मण समाज के शोषण एवं उत्पीड़न का भी आरोप लगाया।

मायावती ने कहा कि उनके अनुसार सपा सरकारों में इन वर्गों के हित में सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए और केवल गुंडों, बदमाशों, माफियाओं तथा अन्य अराजक तत्वों को फायदा पहुंचा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन सरकारों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति ऐसी थी कि शाम होने के बाद बहन-बेटियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था।

यूपी चुनाव से पहले मायावती की अपील

बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के विचारों तथा 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' की नीति से कभी समझौता नहीं कर सकती। उन्होंने सपा पर गठबंधन की राजनीति में केवल अपना राजनीतिक हित साधने और काम निकलने के बाद सहयोगियों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

मायावती ने सर्वसमाज के लोगों से सपा की कथित संकीर्ण और जातिवादी राजनीति से सावधान रहने की अपील की। साथ ही उन्होंने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा को सत्ता में नहीं आने देने की अपील करते हुए इसे जनता के हित में बताया।

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