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समाचारदेश Alert Star Digital Team Aug 24, 2026 12:21 PM

Lutyens Bungalows पर करोड़ों का खर्च, 12 साल में Maintenance Cost ने छुआ 547 करोड़ का आंकड़ा

दिल्ली के लुटियंस बंगला जोन में स्थित केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। करीब एक सदी पुराने इन सरकारी बंगलों की मरम्मत, साज-सज्जा और रखरखाव पर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

Lutyens Bungalows पर करोड़ों का खर्च, 12 साल में Maintenance Cost ने छुआ 547 करोड़ का आंकड़ा

दिल्ली के लुटियंस बंगला जोन में स्थित केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। करीब एक सदी पुराने इन सरकारी बंगलों की मरम्मत, साज-सज्जा और रखरखाव पर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह राशि 2014-15 में हुए 27.47 करोड़ रुपये के खर्च के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है।

पीटीआई को आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार, 2014-15 से 2025-26 तक केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों की मरम्मत और रखरखाव पर कुल 547.68 करोड़ रुपये खर्च हुए। इन सरकारी आवासों की मरम्मत और रखरखाव का काम केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के जिम्मे है।

पुराने बंगलों की हालत और महंगाई ने बढ़ाया Maintenance Cost

सीपीडब्ल्यूडी अधिकारियों के मुताबिक, लुटियंस जोन के अधिकांश सरकारी बंगले करीब 80 से 100 वर्ष पुराने हैं। लंबे समय से इस्तेमाल होने के कारण इन इमारतों में सीपेज, दीमक, पुराने इलेक्ट्रिकल सिस्टम, प्लंबिंग और अन्य मरम्मत संबंधी समस्याएं सामने आती रहती हैं। इसके अलावा निर्माण सामग्री और सेवाओं की बढ़ती कीमतों का असर भी रखरखाव के कुल खर्च पर पड़ा है।

अधिकारियों के अनुसार, कुछ इमारतों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि वे संरचनात्मक रूप से असुरक्षित हो गई थीं और उन्हें अपग्रेड करने की आवश्यकता पड़ी। अतीत में कुछ पुराने बंगलों को ध्वस्त कर नए सिरे से बनाने के प्रस्तावों पर चर्चा भी हुई थी, हालांकि ऐसी योजनाओं की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।

12 साल में तीन गुना से ज्यादा बढ़ा सालाना खर्च

आरटीआई के आंकड़े बताते हैं कि केंद्रीय मंत्रियों के आवासों की मरम्मत और अपग्रेडेशन पर 2014 से 2019 के बीच हर साल औसतन 26.78 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बाद 2019 से 2024 के दौरान यह औसत करीब 50 करोड़ रुपये सालाना पहुंच गया।

खर्च में सबसे बड़ी तेजी हाल के वर्षों में देखने को मिली। वित्त वर्ष 2024-25 में सरकारी मंत्रियों के आवासों पर 71.98 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 2025-26 में यह रकम बढ़कर रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये हो गई।

वर्षवार कितना खर्च हुआ?

आरटीआई के अनुसार, 2014-15 में 27.47 करोड़ रुपये, 2015-16 में 29.57 करोड़ रुपये और 2016-17 में 30.10 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बाद 2017-18 में 23.34 करोड़ और 2018-19 में 23.42 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

वहीं 2019-20 में 26.37 करोड़ रुपये, 2020-21 में 53.87 करोड़ रुपये, 2021-22 में 40.84 करोड़ रुपये और 2022-23 में 73.86 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2023-24 में यह आंकड़ा 54.52 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2024-25 में 71.98 करोड़ और 2025-26 में 92.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

एक मंत्री के आवास पर औसतन 1.2 करोड़ रुपये का खर्च

केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अलग-अलग समय पर लगभग 70 से 72 कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में 92.35 करोड़ रुपये के कुल खर्च को इस संख्या के आधार पर देखें तो एक मंत्री के आवास पर औसतन करीब 1.2 करोड़ रुपये खर्च आता है।

हालांकि, हर सरकारी बंगले पर होने वाला वास्तविक खर्च उसकी स्थिति और वहां आवश्यक मरम्मत के काम के अनुसार अलग-अलग होता है। आरटीआई में उन लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के सरकारी आवासों पर हुए खर्च को शामिल नहीं किया गया है, जो मंत्री नहीं हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के कार्यालयों पर होने वाले खर्च के आंकड़े भी इसमें शामिल नहीं हैं।

Lutyens Zone का नाम, लेकिन ज्यादातर बंगले दूसरे Architects ने डिजाइन किए

इतिहासकार और लेखिका स्वप्ना लिडल ने पीटीआई को बताया कि लुटियंस बंगला जोन का नाम ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस के नाम पर पड़ा है। हालांकि, उनके अनुसार लुटियंस ने मुख्य रूप से राष्ट्रपति भवन के आसपास स्थित राष्ट्रपति एस्टेट के सरकारी बंगलों को डिजाइन किया था।

स्वप्ना लिडल के मुताबिक, नई दिल्ली में औपनिवेशिक दौर के अधिकांश सरकारी बंगले ब्रिटिश शासन के समय पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट से जुड़े वास्तुकारों ने डिजाइन किए थे। इन बंगलों में बड़े भूखंडों पर मुख्य आवास के साथ कर्मचारियों के लिए अलग इमारतें भी बनाई गई थीं।

उन्होंने बताया कि कृष्ण मेनन मार्ग पर स्थित वह बंगला, जिसमें वर्तमान में गृह मंत्री अमित शाह रहते हैं, कभी पुराने संसद भवन तथा नॉर्थ और साउथ ब्लॉक के वास्तुकार हर्बर्ट बेकर का आवास हुआ करता था।

हर कुछ महीने में बिजली और Plumbing की जरूरत

एक केंद्रीय मंत्री के कर्मचारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर पीटीआई को बताया कि इन सरकारी आवासों में सबसे आम मरम्मत संबंधी जरूरतें बिजली और प्लंबिंग से जुड़ी होती हैं। उनके अनुसार, कुछ महीनों के अंतराल पर पंखों, एलईडी लाइट और प्लंबिंग से जुड़े काम कराने की जरूरत पड़ती है, जबकि कुछ वर्षों के बाद फर्श की टाइलें भी बदलनी पड़ती हैं।

इससे पहले सितंबर 2009 में आरटीआई के माध्यम से सामने आई जानकारी में बताया गया था कि 2004 से 2009 के बीच पांच वर्षों में सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को आवंटित बंगलों के रखरखाव और नवीनीकरण पर कुल 93.50 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। मौजूदा आंकड़ों से संकेत मिलता है कि पुराने सरकारी बंगलों के रखरखाव और मरम्मत पर होने वाला खर्च पिछले वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है।

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