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समाचारविदेशअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Dec 22, 2025 12:09 PM

भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक FTA का ऐलान, 20 बिलियन डॉलर के निवेश का वादा और वैश्विक व्यापार में नया मोड़

भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों में आज (22 दिसंबर, 2025) एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने टेलीफोन पर बातचीत के दौरान भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के सफल समापन की संयुक्त घोषणा की।

भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक FTA का ऐलान, 20 बिलियन डॉलर के निवेश का वादा और वैश्विक व्यापार में नया मोड़

भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों में आज (22 दिसंबर, 2025) एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने टेलीफोन पर बातचीत के दौरान भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement - FTA) के सफल समापन की संयुक्त घोषणा की। यह समझौता न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके जरिए भारत ने वैश्विक व्यापारिक रणनीतियों में अपनी पकड़ और मजबूत की है।

रिकॉर्ड 9 महीनों में पूरा हुआ '9 साल' का काम

इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी गति रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार:

  • शुरुआत: बातचीत औपचारिक रूप से मार्च 2025 में पीएम लक्सन के भारत दौरे के दौरान शुरू हुई थी।
  • समय सीमा: महज 9 महीनों के रिकॉर्ड समय में इसे पूरा कर लिया गया।
  • राजनीतिक इच्छाशक्ति: दोनों नेताओं ने इसे "ऐतिहासिक" बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों की साझा विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

20 बिलियन डॉलर का विशाल निवेश और व्यापार लक्ष्य

इस समझौते के तहत न केवल शुल्कों में कटौती की गई है, बल्कि निवेश के बड़े लक्ष्य भी रखे गए हैं:

  • निवेश: न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये) के निवेश के लिए प्रतिबद्ध है।
  • व्यापार का दोगुना होना: दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का विश्वास जताया है।
  • प्रमुख क्षेत्र: डेयरी (सीमित पहुँच के साथ), फार्मास्यूटिकल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, आईटी और कृषि उत्पादों को इस समझौते से बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

ट्रंप और वैश्विक व्यापार के लिए इसके क्या मायने हैं?

विशेषज्ञ इस समझौते को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "टैरिफ-फर्स्ट" (शुल्क आधारित) संरक्षणवादी नीतियों के जवाब के रूप में देख रहे हैं:

  1. निर्यात विविधीकरण (Export Diversification): ट्रंप द्वारा घोषित संभावित शुल्कों (जैसे 60% टैरिफ) के जोखिम को कम करने के लिए भारत तेजी से अन्य विकसित देशों (जैसे न्यूजीलैंड और यूके) के साथ एफटीए कर रहा है।
  2. बाजार विस्तार: यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए एक वैकल्पिक और स्थिर बाजार खोलता है, जिससे अमेरिकी नीतियों पर निर्भरता कम होगी।
  3. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दबदबा: न्यूजीलैंड के साथ यह साझेदारी इस क्षेत्र में चीन और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने में भारत की मदद करेगी।

क्या-क्या बदलेगा? मुख्य बिंदु

  • शुल्क कटौती: न्यूजीलैंड से भारत आने वाले लगभग 95% निर्यात पर टैरिफ कम या खत्म हो जाएंगे।
  • भारतीय निर्यात: रत्न, वस्त्र, ऑटोमोबाइल और दवाओं के लिए न्यूजीलैंड का बाजार अब और सुलभ होगा।
  • सॉफ्टवेयर और प्रतिभा: भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर भी सहमति बनी है।

यह समझौता भारत की "मेक इन इंडिया" पहल को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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