होम Europe Heatwave: साइलेंट किलर बनी भीषण गर्मी! 1,300 से ज्यादा मौतें, AC खरीदने की मची होड़, WHO की बड़ी चेतावनी

समाचारविदेश Alert Star Digital Team Jun 29, 2026 08:00 PM

Europe Heatwave: साइलेंट किलर बनी भीषण गर्मी! 1,300 से ज्यादा मौतें, AC खरीदने की मची होड़, WHO की बड़ी चेतावनी

यूरोप इस समय रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव की चपेट में है। दक्षिण-पश्चिमी यूरोप से शुरू हुई भीषण गर्मी अब पूर्वी यूरोप तक फैल चुकी है और कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है।

Europe Heatwave: साइलेंट किलर बनी भीषण गर्मी! 1,300 से ज्यादा मौतें, AC खरीदने की मची होड़, WHO की बड़ी चेतावनी

यूरोप इस समय रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव की चपेट में है। दक्षिण-पश्चिमी यूरोप से शुरू हुई भीषण गर्मी अब पूर्वी यूरोप तक फैल चुकी है और कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। फ्रांस, इटली, स्पेन, पोलैंड, चेक गणराज्य और लिथुआनिया समेत कई देशों में गर्मी ने हालात गंभीर बना दिए हैं। अब तक इस हीटवेव के कारण पूरे यूरोप में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आशंका जताई है कि यह संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।

फ्रांस में सबसे ज्यादा तबाही, तीन दिनों में 1,000 से अधिक मौतें

यूरोप में सबसे गंभीर स्थिति फ्रांस में देखने को मिली है। फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, 24 जून के बाद से देश में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत दर्ज की गई है। इनमें अधिकांश मौतें पिछले सप्ताह के तीन सबसे गर्म दिनों के दौरान हुईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों में 85 प्रतिशत से अधिक लोग 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। पेरिस और इले-डी-फ्रांस क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। स्वास्थ्य एजेंसी ने यह भी बताया कि घरों में होने वाली मौतों की संख्या सामान्य से करीब 40 प्रतिशत अधिक रही, जिससे संकेत मिलता है कि कई लोग अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ बैठे।

इसके अलावा हीटवेव के दौरान फ्रांस में कम से कम 74 लोगों की नदियों, झीलों और अन्य जलाशयों में डूबने से भी मौत हुई है। देश का राष्ट्रीय तापमान इंडेक्स 29.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो वर्ष 1947 से रिकॉर्डिंग शुरू होने के बाद सबसे अधिक है।

WHO ने हीटवेव को बताया 'साइलेंट किलर'

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए बताया कि 21 जून के बाद से पूरे यूरोप में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने हीट स्ट्रेस को 'साइलेंट किलर' बताते हुए कहा कि यह बिना किसी शोर-शराबे के लोगों की जान ले लेता है।

टेड्रोस ने कहा, 'यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है, जो वैश्विक औसत से दोगुनी दर से गर्म हो रहा है. अभी 150 मिलियन लोग भीषण गर्मी के तहत जी रहे हैं, सैकड़ों लोग मारे गए हैं, स्कूल बंद हैं और बिजली ग्रिड चरमरा रहे हैं.'

उन्होंने यह भी कहा कि जो हीटवेव पहले एक पीढ़ी में एक बार आती थी, अब लगभग हर साल देखने को मिल रही है। WHO ने यूरोपीय देशों से प्रभावी Heat-Health Action Plan लागू करने की अपील की है। संगठन के अनुसार, पिछले चार वर्षों में अकेले यूरोप में गर्मी से दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

भीषण गर्मी से AC और पंखों की मांग में जबरदस्त उछाल

गर्मी बढ़ने के साथ ही फ्रांस, इटली और अन्य यूरोपीय देशों में एयर कंडीशनर और पंखों की मांग तेजी से बढ़ गई है। यूरोप के अधिकांश घर अत्यधिक गर्मी को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं, इसलिए यहां एसी का उपयोग पहले अपेक्षाकृत कम होता था।

कारफोर और अमेजन जैसे बड़े रिटेलर्स के यहां पंखों और एयर कंडीशनर की बिक्री में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इंस्टॉलेशन करने वाले तकनीशियनों के पास इतनी ज्यादा बुकिंग आ रही है कि मांग पूरी करना मुश्किल हो गया है। मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक के अनुसार, फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन और जर्मनी में एयर कंडीशनर की बिक्री काफी मजबूत रही है।

AC को लेकर छिड़ी राजनीतिक बहस

भीषण गर्मी ने फ्रांस में राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन बुजुर्गों और कमजोर वर्गों के लिए सरकारी सब्सिडी के साथ बड़े पैमाने पर एयर कंडीशनर लगाने की वकालत कर रही हैं। वहीं, पारंपरिक रूप से एसी के विरोध में रहने वाली ग्रीन पार्टी ने भी माना है कि मौजूदा परिस्थितियों में सीमित स्तर पर एयर कंडीशनिंग जरूरी हो गई है।

दूसरी ओर वामपंथी दलों का कहना है कि बड़े पैमाने पर एयर कंडीशनर का उपयोग बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डालेगा और शहरों में गर्म हवा बढ़ाकर जलवायु संकट को और गंभीर बना सकता है। माना जा रहा है कि यह मुद्दा 2027 के फ्रांसीसी राष्ट्रपति चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक विषय बन सकता है।

पूर्वी यूरोप में भी टूट रहे तापमान के रिकॉर्ड

हीटवेव का असर अब पूर्वी यूरोप में भी तेजी से दिखाई दे रहा है। 28 जून को लिथुआनिया के दक्षिणी शहर ड्रुस्किनिन्काई में 36.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो जून महीने का नया रिकॉर्ड है।

चेक गणराज्य में राजधानी प्राग के उत्तर स्थित डोक्सानी में तापमान 41.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जबकि पोलैंड के स्लुबिस शहर में 40.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। यदि इसकी आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह पोलैंड के इतिहास का सबसे अधिक तापमान होगा। राजधानी वारसॉ में भी 37.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज कर 2013 का रिकॉर्ड टूट गया।

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