होम ट्रंप की नीतियों से खोखला हो रहा अमेरिका, यूरोप के कर्ज में डूबा सुपरपावर, इकोनॉमिस्ट की भविष्यवाणी ने बढ़ाई चिंता
वैश्विक महाशक्ति अमेरिका की आर्थिक सेहत को लेकर एक बेहद डराने वाली तस्वीर सामने आई है। मशहूर अर्थशास्त्री और PAICE के को-फाउंडर लार्स क्रिस्टेंसन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है।
वैश्विक महाशक्ति अमेरिका की आर्थिक सेहत को लेकर एक बेहद डराने वाली तस्वीर सामने आई है। मशहूर अर्थशास्त्री और PAICE के को-फाउंडर लार्स क्रिस्टेंसन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि ट्रंप की नीतियां अमेरिका को अंदर से खोखला कर रही हैं और देश 'भ्रम' में जी रहा है। क्रिस्टेंसन के मुताबिक, अमेरिका जिस तरह अपने ही बनाए अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ रहा है, उससे जल्द ही उसे दुनिया से कर्ज मिलना बंद हो सकता है, जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित होगा।
क्रिस्टेंसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा कि असली समस्या सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप नहीं, बल्कि खुद अमेरिका का रवैया है। उन्होंने कहा, "अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद खुद अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था बनाई थी, लेकिन अब उसी के साथ विश्वासघात कर रहा है." उनके अनुसार, अमेरिका पिछले 20 सालों से अपनी हैसियत से ज्यादा खर्च कर रहा है। कड़वी सच्चाई यह है कि अमेरिकी लोगों का निजी और सरकारी खर्च यूरोपीय सेंट्रल बैंकों और पेंशन फंडों के पैसे से चल रहा है।
आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि अमेरिका आर्थिक रूप से यूरोप पर कितना निर्भर है। यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट और ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक एनालिसिस के डेटा के मुताबिक:
क्रिस्टेंसन ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका अपने सहयोगियों को धमकाता है, उनकी जमीन (जैसे ग्रीनलैंड) पर दावा करता है या टैरिफ का डर दिखाता है, तो वह एक 'तानाशाह' देश जैसा व्यवहार कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, "अगर अमेरिका नियमों का पालन नहीं करता, तो डॉलर पर भरोसा कैसे किया जाए? डॉलर को रखना मूर्खता होगी." उनका मानना है कि ऐसे हालात में कोई भी समझदार निवेशक या देश अमेरिका को कर्ज देने का जोखिम नहीं उठाएगा, क्योंकि वहां पूंजी नियंत्रण (Capital Control) का खतरा बढ़ जाएगा।
अर्थशास्त्री ने साफ लफ्जों में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप जितने दिन सत्ता में रहेंगे, अमेरिका का नुकसान उतना ही बढ़ता जाएगा। हाल ही में ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड खरीदने की कोशिश और यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी देने की घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर अमेरिका की साख गिराई है। क्रिस्टेंसन का कहना है कि अब यह अमेरिकी जनता की जिम्मेदारी है कि वे दुनिया को साबित करें कि ट्रंप एक अपवाद हैं, न कि पूरे अमेरिका की सोच। अगर यूरोप से फंडिंग रुक गई, तो अमेरिका के लिए अपना खर्च चलाना नामुमकिन हो जाएगा।
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