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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेशअपराध Alert Star Digital Team Jan 19, 2026 06:42 PM

उन्नाव केस: जेल में ही रहेंगे कुलदीप सेंगर! हाई कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, खारिज की यह अहम याचिका

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंगर को एक और करारा झटका देते हुए उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है,

उन्नाव केस: जेल में ही रहेंगे कुलदीप सेंगर! हाई कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, खारिज की यह अहम याचिका

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंगर को एक और करारा झटका देते हुए उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी सजा को निलंबित (सस्पेंड) करने की मांग की थी। जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया कि राहत की कोई गुंजाइश नहीं है। बता दें कि हिरासत में मौत के इस मामले में कुलदीप सेंगर को 10 साल की सजा सुनाई गई है, जिसे कम करवाने या रुकवाने के लिए उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

'कोई नरमी नहीं बरती जा सकती'

निचली अदालत ने 13 मार्च 2020 को इस मामले में फैसला सुनाते हुए कुलदीप सेंगर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और साथ ही 10 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया था। उस समय अदालत ने बहुत सख्त टिप्पणी की थी, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा था कि परिवार के 'एकमात्र कमाने वाले सदस्य' की हत्या के मामले में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। इसी आधार पर अब हाई कोर्ट ने भी सजा में दखल देने से इनकार कर दिया है।

भाई अतुल सिंह सेंगर को भी मिली थी सजा

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अदालत ने कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर समेत पांच अन्य लोगों को भी 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई थी। जांच में यह साबित हुआ था कि कुलदीप सेंगर के कहने पर ही पीड़िता के पिता को शस्त्र अधिनियम (Arms Act) के तहत झूठे मामले में फंसाकर गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पुलिस हिरासत में उनके साथ इतनी बर्बरता की गई कि 9 अप्रैल 2018 को उनकी मौत हो गई थी।

गैर-इरादतन हत्या में अधिकतम सजा

गौरतलब है कि कुलदीप सेंगर साल 2017 में एक नाबालिग लड़की के अपहरण और रेप के मामले में भी दोषी पाए गए थे। हिरासत में मौत के मामले में निचली अदालत ने यह माना था कि भले ही हत्या का पूर्व-नियोजित इरादा साबित न हुआ हो, लेकिन कृत्य गंभीर था। इसलिए सेंगर को आईपीसी के तहत हत्या का दोषी तो नहीं ठहराया गया, लेकिन आईपीसी की धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत दोषियों को अधिकतम सजा सुनाई गई थी, जो बदस्तूर जारी रहेगी।

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