होम शरद और अजित पावर क्या आएंगे साथ? जानें NCP के मर्जर के सियासी मायने

समाचारदेश Alert Star Digital Team Jan 2, 2025 10:38 PM

शरद और अजित पावर क्या आएंगे साथ? जानें NCP के मर्जर के सियासी मायने

शरद और अजित पावर क्या आएंगे साथ? जानें NCP के मर्जर के सियासी मायने

शरद और अजित पावर क्या आएंगे साथ? जानें NCP के मर्जर के सियासी मायने

महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है. महाराष्ट्र में शरद पवार और अजित पवार दोनों फिर से एक साथ आ सकते हैं. इसे लेकर कयास तेज हो गये हैं. अजित पवार की पार्टी के नेता खुलकर ये बयान दे रहे हैं. आज नहीं तो आनेवाले कुछ महीनों में शरद पवार और अजीत पवार साथ-साथ आयेंगे ? क्या एनसीपी का मर्जर होगा? यदि एनसीपी का मर्जर होता है, तो देश और महाराष्ट्र की सियासत में इसका क्या असर होगा? आइए जानते हैं.महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार की माताजी आशाताई पवार ने जैसे ही पंढरपुर में जाकर भगवान विट्ठल के दर्शन किए और ये बयान दिया कि उन्होंने मन्नत मांगी है कि उनका पूरा पवार परिवार दोबारा एक हो जाए. इस खबर को और बल मिल गया कि दोनों पवार परिवार दोबारा मिल सकता है. एनसीपी प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की माता आशा ताई पवार ने कहा कि भगवान विट्ठल मेरी प्रार्थना सुनेंगे शरद पवार अजीत पवार साथ आएंगे.अजित पवार के नेता और मंत्री भी ये कहते हुए नजर आ रहे हैं कि शरद पवार और अजित पवार को साथ आना चाहिए. अजित पवार के नेता एनसीपी के मर्जर की मांग कर रहे है, लेकिन शरद पवार के नेता खुलकर अभी इसपर बोलने आए बच रहे हैं, वो सिर्फ इतना कह रहे है कि 8 और 9 जनवरी को शरद पवार पार्टी की बैठक है. उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है.
अजित और शरद पवार क्या फिर आएंगे साथ?
एनसीपी नेता और सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि शरद पवार हमारे लिए हमेशा लिए देवता की तरह रहे हैं भले हमारे राजनीतिक रास्ते अलग हो पर उनके प्रति हमे सम्मान है और आगे भी रहेगा. दोनों साथ आते हैं या पवार परिवार साथ आए तो हमे खुशी ही होगी. यह अच्छी बात है. मैं भी पवार परिवार का एक हिस्सा ही हूं, इसलिए यह सब एक होंगे तो मुझे भी खुशी ही होगी.वहीं, शरद पवार की पार्टी के प्रवक्ता महेश तपासे ने कहा कि अभी मर्जर की बातें जल्दबाजी होगी. शरद पवार ने अगले हफ्ते मुंबई में एनसीपी शरद पवार पार्टी की बैठक बुलाई. उस बैठक में इन तमाम मुद्दों पर चर्चा होगी.
अजित पवार की मां के बयान से अटकलें तेज
बता दें कि अजित पवार की मां आशा पवार शुरू से शरद पवार और अजित पवार के दो अलग-अलग दल बनाने के खिलाफ थीं. जब सुप्रिया सुले लोकसभा का चुनाव जीती थी, तब भी वे अपनी चाची याने अजित पवार के माताजी से आशीर्वाद लेने गई थी. वहीं अजित पवार शरद पवार साथ आने से फायदा NDA को ही होगा.भले शरद पवार उनकी विचारधारा को लेकर एनडीए के साथ ना आये, पर उनके सांसद और विधायक भी मर्जर के लिए अनुकूल बताये जा रहे हैं. सरकार के साथ रहे तो फंड मिलेगा. चुनाव क्षेत्र में विकास कर पायेंगे, इसलिए शरद पवार पर भी दबाव है. सिर्फ दो से तीन नेता जिनकी अजित पवार से नहीं बनती, उनका ही विरोध है.भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेता मंत्री भी खुलकर इस बात को कह रहे हैं कि शरद पवार और अजित पवार का साथ आना दोनों परिवार के रिश्तों को मजबूत करेगा. शिंदे के मंत्री भरत गोगावले तो यहां तक कह रहे हैं कि राजनीति और क्रिकेट में कुछ भी संभव है. शरद पवार के आने से हम मजबूत होंगे.
एनसीपी के मर्जर से बढ़ेगी ताकत
दोनों एनसीपी साथ आये या शरद पवार के सांसद अजित के साथ जाए तो मोदी सरकार की ताकत बढ़ेगी और एनडीए में एनसीपी का कद भी. शरद पवार पार्टी के 9 तो अजित पवार एनसीपी का सिर्फ एक सांसद हैं. अगर दोनों पवार मिलते हैं तो केंद्र में एनसीपी के 10 सांसद हो जाएंगे तो राज्य में शरद पवार की ताकत सरकार में बढ़ जाएगी. हालांकि इससे सबसे ज्यादा नुकसान उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कोंग्रेस पार्टी के इंडिया गठबंधन को होगा.

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