होम उपमुख्यमंत्री से उपाध्यक्ष तक… महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री फाइनल लेकिन ये पेच अब भी उलझे!

समाचारदेश Alert Star Digital Team Nov 29, 2024 09:03 PM

उपमुख्यमंत्री से उपाध्यक्ष तक… महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री फाइनल लेकिन ये पेच अब भी उलझे!

उपमुख्यमंत्री से उपाध्यक्ष तक… महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री फाइनल लेकिन ये पेच अब भी उलझे!

उपमुख्यमंत्री से उपाध्यक्ष तक… महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री फाइनल लेकिन ये पेच अब भी उलझे!

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री को लेकर पेच लगभग सुलझ गया है, लेकिन डिप्टी सीएम, डिप्टी स्पीकर और विभागों के बंटवारे जैसे मुद्दों पर अब भी चकल्लस जारी है. कहा जा रहा है कि इसी वजह से मुख्यमंत्री के नाम के आधिकारिक ऐलान में 2 से 3 दिन का लंबा वक्त लग सकता है. दरअसल, महायुति गठबंधन की कवायद सभी पेच सुलझाने के बाद ही विधायक दल की बैठक बुलाने की योजना है.विधायक दल की बैठक में ही आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री के नाम का चयन होगा. सूत्रों के मुताबिक सीएम पद पर देवेंद्र फडणवीस के नाम पर सहमति बन गई है, लेकिन बाकी के पेच अभी भी सुलझने बाकी हैं.महाराष्ट्र विधानसभा के हालिया चुनाव में महायुति को 288 में से करीब 230 सीटों पर जीत मिली है, जो जादुई आंकड़े 145 से काफी ज्यादा है.
शिंदे बनेंगे डिप्टी सीएम?
पहला पेच एकनाथ शिंदे को लेकर है. महाराष्ट्र के निवर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे क्या नई सरकार में डिप्टी सीएम बनेंगे, इसकी चर्चा हो रही है. 2022 में जब महायुति की सरकार बनी तो एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री और देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री बनाए गए. बाद में अजित पवार को भी डिप्टी सीएम की कमान मिली.वर्तमान में भी एक सीएम के साथ 2 डिप्टी सीएम बनाने की बात कही जा रही है. सीएम की कुर्सी बीजेपी को मिल गई है. अजित पवार भी डिप्टी सीएम पद से संतुष्ट हैं, लेकिन बात शिंदे को लेकर नहीं बन पा रही है.कहा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे अपने सांसद बेटे श्रीकांत को भी डिप्टी सीएम बना सकते हैं. यह फैसला कर एकनाथ शिंदे एक साथ दो सियासी संदेश देना चाहते हैं.
1. शिवसेना (यूबीटी) ने विधायक दल का नेता आदित्य ठाकरे को चुन लिया है. आदित्य उद्धव के बेटे हैं और इसे जैनरेशन शिफ्ट के तौर पर भी देखा जा रहा है. शिंदे भी अपने बेटे को पद देकर महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूती से स्थापित करना चाहते हैं. श्रीकांत अभी तक दिल्ली की ही सियासत कर रहे हैं.
2. एकनाथ शिंदे सीएम रहे हैं और खुद का डिमोशन नहीं कराना चाहते हैं. अपने फैसले को ऐतिहासिक बनाए रखने के लिए भी वे डिप्टी सीएम नहीं बनना चाहते हैं. शिंदे की ही सरकार ने लाडकी बहिन योजना की शुरुआत की थी, जिसका महाराष्ट्र में असर भी दिखा.
डिप्टी स्पीकर पर भी पेच
2019 में डिप्टी स्पीकर का पद एनसीपी को मिला था. नरहरि जिरवाल डिप्टी स्पीकर बनाए गए थे. इस बार का सियासी परिदृश्य बदला हुआ है. बीजेपी नंबर वन की पार्टी बन गई है. शिंदे की शिवसेना दूसरे नंबर पर है. स्पीकर का पद बीजेपी अपने पास रखेगी. ऐसे में डिप्टी स्पीकर के पद पर शिंदे सेना की दावेदारी है.
हालांकि, अजित भी अपने लिए डिप्टी स्पीकर का पद चाह रहे हैं. इस पर भी फाइनल फैसला होना है. आमतौर पर डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परंपरा है, लेकिन लंबे वक्त से भारत की राजनीति पार्टियां अपने सहयोगियों को साधने के लिए यह पद दे देती है.
विभाग बंटवारे का मसला उलझा
महाराष्ट्र में 2 विभागों को लेकर बड़ा पेच है. पहला वित्त और दूसरा गृह. कहा जा रहा है कि इस बार दोनों ही विभाग बीजेपी अपने पास रखना चाह रही है. एकनाथ शिंदे की नजर गृह तो अजित पवार की नजर वित्त विभाग पर है.शिंदे पिछली सरकार में डिप्टी सीएम को गृह विभाग देने के तर्क पर दावेदारी कर रहे थे. एकनाथ शिंदे की सरकार में देवेंद्र फडणवीस को डिप्टी सीएम की कमान मिली थी.
अजित पवार पिछली सरकार में वित्त मंत्री थे, लेकिन इस बार उन्हें यह पद मिले, इसकी गुंजाइश कम दिख रही है. अब तक जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक एनसीपी को कृषि, सिंचाई और खाद्य आपूर्ति जैसे विभाग दिए जा सकते हैं.बीजेपी खुद के पास वित्त, गृह, कार्मिक और राजस्व रखेगी. शिंदे सेना को शहरी विकास और लोकनिर्माण पोटर्फोलियो देने की बात कही जा रही है.
महाराष्ट्र में सरकार बनाने का फॉर्मूला
महाराष्ट्र सरकार में कुल 43 मंत्री बनाए जा सकते हैं. अभी एनडीए के पास करीब 230 विधायक हैं. इस लिहाज से करीब 5 विधायकों पर एक मंत्री पद मिलने की संभावनाएं जताई जा रही है.छोटी पार्टियों को बीजेपी अपने कोटे से एडजस्ट कर सकती है. अजित पवार के पास 41 विधायक हैं. उन्हें अधिकतम 8 मंत्री पद मिल सकते हैं. जबकि 57 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली शिंदे सेना की डिमांड 12 मंत्री पद है.

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