होम आरोप साबित नहीं हुआ तो क्रूरता के आधार पर नहीं हो सकता तलाक, डिवोर्स को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Sep 28, 2024 09:13 PM

आरोप साबित नहीं हुआ तो क्रूरता के आधार पर नहीं हो सकता तलाक, डिवोर्स को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

आरोप साबित नहीं हुआ तो क्रूरता के आधार पर नहीं हो सकता तलाक, डिवोर्स को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

आरोप साबित नहीं हुआ तो क्रूरता के आधार पर नहीं हो सकता तलाक, डिवोर्स को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पति-पत्नी के बीच विवाद में यदि क्रूरता को लेकर लगाए गए आरोप साबित नहीं होते हैं तो अधीनस्थ न्यायालय क्रूरता के आधार पर तलाक की डिग्री मंजूर नहीं कर सकता है।

कोर्ट ने क्रूरता के आधार पर प्रधान परिवार न्यायालय बागपत द्वारा 4 सितंबर 2015 को दी गई तलाक की डिक्री को रद्द कर दिया है।

कविता की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति डी रमेश की खंडपीठ ने दिया। अपीलार्थी कविता की ओर से अधिवक्ता विभु राय ने पक्ष रखा। मामले के अनुसार कविता और रोहित कुमार की शादी साल 2011 में हुई थी। उनकी कोई संतान नहीं हुई। शादी के 2 साल बाद पति रोहित ने परिवार न्यायालय में तलाक का मुकदमा यह कहते हुए दाखिल किया कि उसकी पत्नी झगड़ालू प्रकृति की है। शादी के बाद से ही ससुराल वालों के प्रति उसका व्यवहार अच्छा नहीं है।

पत्नी द्वारा क्रूरता किए जाने को लेकर पति की ओर से जिन दो घटनाओं का उल्लेख किया गया उनमें 16 अप्रैल 2012 की घटना का हवाला दिया गया जिसमें कहा गया कि वह जब अपने चचेरे भाई के साथ ससुराल जा रहा था उसी समय उसके ऊपर हमला किया गया जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। दूसरी घटना 3 जनवरी 2013 की बताई गई जिसमें कहा गया कि उस दिन कविता अपने सास के साथ घर पर अकेली थी। तभी कविता के मायके से उसके पिता और कुछ अन्य रिश्तेदार आए। उसकी मां के साथ झगड़ा और मारपीट की। इसका मुकदमा दर्ज कराया गया। बाद में ट्रायल में सभी आरोपी बरी हो गए।

पत्नी द्वारा क्रूरता किए जाने को लेकर पति की ओर से जिन दो घटनाओं का उल्लेख किया गया उनमें 16 अप्रैल 2012 की घटना का हवाला दिया गया जिसमें कहा गया कि वह जब अपने चचेरे भाई के साथ ससुराल जा रहा था उसी समय उसके ऊपर हमला किया गया जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। दूसरी घटना 3 जनवरी 2013 की बताई गई जिसमें कहा गया कि उस दिन कविता अपने सास के साथ घर पर अकेली थी। तभी कविता के मायके से उसके पिता और कुछ अन्य रिश्तेदार आए। उसकी मां के साथ झगड़ा और मारपीट की। इसका मुकदमा दर्ज कराया गया। बाद में ट्रायल में सभी आरोपी बरी हो गए।|#+|

फैमिली कोर्ट ने इन घटनाओं के आधार पर पत्नी द्वारा क्रूरता किए जाने का आधार पाते हुए तलाक की डिग्री को मंजूरी दे दी। अपीलार्थी के अधिवक्ता का कहना था कि उस पर लगाए गए क्रूरता के आरोप साबित नहीं किए जा सके। सभी आरोप झूठे पाए गए यहां तक कि 16 अप्रैल को हुई घटना की प्राथमिक भी नहीं दर्ज कराई गई थी। जबकि प्रतिवादी स्वयं पुलिस अधिकारी है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए गए आरोप साबित नहीं किया जा सके हैं। इस स्थिति में क्रूरता के आधार पर तलाक को मंजूरी नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने तलाक की डिग्री रद्द कर दी है।

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