होम जमात-ए-इस्लामी के दांव में ऐसी फंसी शेख हसीना, देश छोड़ने के लिए हुई मजबूर; जानें क्या है यह

समाचारविदेश Alert Star Digital Team Aug 5, 2024 09:14 PM

जमात-ए-इस्लामी के दांव में ऐसी फंसी शेख हसीना, देश छोड़ने के लिए हुई मजबूर; जानें क्या है यह

जमात-ए-इस्लामी के दांव में ऐसी फंसी शेख हसीना, देश छोड़ने के लिए हुई मजबूर; जानें क्या है यह

जमात-ए-इस्लामी के दांव में ऐसी फंसी शेख हसीना, देश छोड़ने के लिए हुई मजबूर; जानें क्या है यह

बांग्लादेश में लगातार हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। पीएम शेख हसीना उग्र होते प्रदर्शनों के बीच में देश छोड़कर भारत आ चुकी हैं तो वहीं उनके प्रधानमंत्री आवास में प्रदर्शनकारियों ने घुस कर तोड़फोड़ मचानी शुरू कर दी है।

इन प्रदर्शनकारियों में सबसे बड़ा नाम जमात-ए-इस्लामी का सामने आ रहा है। आरक्षण के मुद्दे को लेकर शुरू हुए प्रदर्शन में जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों ने खूब उत्पात मचाया था, जिसके कारण हसीना सरकार ने इसके छात्र संगठन और इससे जुड़े अन्य संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार प्रतिबंध के बाद यह संगठन और उग्र तरीके से सरकार के खिलाफ सड़कों पर आ गए, जिसके बाद आंदोलन और भी ज्यादा हिंसक हो गया और मुख्य रूप से आवामी लीग और सरकार से जुड़ी सम्पत्ति और इंसानों को निशाना बनाया जाने लगा।

प्रदर्शनकारी इतने उग्र हो गए कि उन्होंने पीएम हाउस के भीतर घुस कर उत्पात मचाना शुरु कर दिया। पीएम हसीना इससे पहले ही देश छोड़कर जा चुकी थीं। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे प्रदर्शन कारी पीएम हाउस में मौज मस्ती कर रहे हैं। इन्हीं में से कुछ ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति कहे जाने वाले शेख मुजीब की मूर्ति पर चढ़कर हथौड़ा चलाया।

शेख हसीना और जमात ए इस्लामी के बीच में क्यों चलती है टसल

जमात ए इस्लामी बांग्लादेश में कट्टर मुसलमानों का एक संगठन है। पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन में इस संगठन से जुड़े लोगों के द्वारा खूब उत्पात मचाया जा रहा था। इसको देखते हुए शेख हसीना ने इससे जुड़े लगभग सभी संगठनों पर बैन लगा दिया। इस बैन से गुस्साए यह लोग और भी ज्यादा हिंसक होकर सड़कों पर आ गए। हसीना सरकार ने इस कट्टर संगठन पर यह कहकर बैन लगाया था कि यह छात्रों के शांति पूर्ण आंदोलन का फायदा उठाकर देश में अराजकता फैलाना चाहता है।

आखिर क्या है जमात-ए-इस्लामी

जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश की एक कट्टरपंथी राजनैतिक पार्टी है। यह पार्टी बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया की समर्थक पार्टियों में शामिल है। इसकी स्थापना 1941 में अविभाजित भारत में हुई थी। फिर आजादी के समय इसका एक धड़ा बांग्लादेश में राजनैतिक रूप से सक्रिय हो गया था। लेकिन 2018 के बांग्लादेश हाईकोर्ट के एक फैसले का पालन करते हुए बांग्लादेसी चुनाव आयोग ने इस पर बैन लगा दिया था।

जमात-ए-इस्लामी का नाम बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हमला करने में भी आता रहता है। मानवाधिकार संस्थाओं के अनुसार जमात ए इस्लामी के कार्यकर्ता लगातार बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं को निशाना बनाते रहे हैं।

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