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भारत- लक्जमबर्ग शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी ने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर दिया जोर
नई दिल्ली-उन्होंने लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री जेवियर बेटेल से बातचीत के दौरान कहा, ''आज जब विश्व कोविड-19 महामारी की आर्थिक और स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहा है, भारत-लक्जमबर्ग के बीच सहयोग दोनों देशों के साथ-साथ दोनों क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति सुधारने में उपयोगी हो सकता है। '' मोदी ने कहा ''लोकतंत्र, कानून का राज और स्वतंत्रता जैसे साझा आदर्श हमारे संबंधों और आपसी सहयोग को मजबूती देते हैं। भारत और लक्जमबर्ग के बीच आर्थिक आदान-प्रदान बढ़ाने का बहुत क्षमता है।'' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस्पात, वित्तीय तकनीक और डिजिटल डोमेन जैसे क्षेत्रों में हमारे बीच अभी भी अच्छा सहयोग है किंतु इसे और आगे ले जाने की अपार संभावनाएं हैं।''लक्जमबर्ग विश्व के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में एक है। कई भारतीय कंपनियों ने लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज में ''ग्लोबल डिपाजटॉरी रिसीट'' के माध्यम से वित्तीय संसाधन जुटाए हैं। प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) द्वारा लक्जमबर्ग के चार उपग्रहों को प्रक्षेपित किए जाने पर प्रसन्नता जताई और उम्मीद जताई कि दोनों देश अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भी पारस्परिक आदान प्रदान बढ़ा सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में लक्जमबर्ग के शामिल होने की घोषणा का स्वागत करते हुए बेटेल को आपदा प्रबंधन अवसंरचना पर अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया। भारत और लक्जमबर्ग के बीच दो दशकों में पहली बार आयोजित शिखर बैठक को बृहस्पतिवार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक आदान-प्रदान बढ़ाने की बहुत क्षमता है। प्रधानमंत्री ने दुनिया के इस तीसरे सबसे बड़े विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) देश से वित्तीय और डिजिटल तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि लोकतंत्र, कानून का राज और स्वतंत्रता जैसे साझा आदर्शों ने दोनों देशों के संबंधों और आपसी सहयोग को मजबूती दी है।
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