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चंद्रमा के उल्कापिंड में मिला नया खनिज, धरती के आंतरिक भाग के खुलेंगे रहस्य
यूरोपीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने चंद्रमा के उल्कापिंड ओइड एलाइटिस 001 में डॉनविलहेलम्साइट नामक एक नए उच्च दबाव वाले खनिज की खोज की है। अमेरिकन मिनरोलॉजिस्ट नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, चंद्रमा का यह नया खनिज पृथ्वी के मैंटल (आंतरिक भाग) के बारे में भी विस्तृत जानकारी दे सकता है।
इससे बना है मेंटल
मैंटल पृथ्वी की सतह से 35 किमी नीचे मोहो डिस्कंटिन्यूइटी से शुरू होता है एवं 2900 किमी तक (मोहो डिस्कंटिन्यूइटी बाहरी कोर) गहरा है। मैंटल की सबसे ऊपरी परत एस्थेनोस्फेयर कहलाती है, जो मोटाई में 10 से 200 किमी तक है। इसका निचला स्तर इसके नीचे से शुरू होता है। इस स्तर में मेंटल का घनत्व 2.9 से 3.3 के बीच रहता है। यह ठोस पत्थर एवं मैग्मा से मिलकर बना हुआ है। नया खनिज मुख्य रूप से कैल्शियम, एल्यूमीनियम, सिलिकॉन और ऑक्सीजन परमाणुओं का मिश्रण है।
पृथ्वी की चट्टानों के समान है यह पिंड
बता दें कि ओइड एलाइटिस 001 वर्ष 2014 में पश्चिमी सहारा में मिला था। यह पृथ्वी की चट्टानों के समान है। शोधकर्ताओं ने कहा कि पृथ्वी के महाद्वीपों से इरोडेड तलछट हवाओं और नदियों द्वारा महासागरों में पहुंचता है और धीरे-धीरे घने महासागरीय क्रस्ट के हिस्से के रूप में पृथ्वी के मैंटल (आंतरिक भाग) में चले जाते हैं। पृथ्वी में गहराई में जाने के दौरान दबाव और तापमान बढ़ने से यह तलछट सघन खनिज में बदल जाता है।
'मैंटल' को करता है अलग
अध्ययन में कहा गया है कि नए खनिज डॉनविलहेलम्साइट का निर्माण 460 से 700 किलोमीटर की गहराई में होता है। यह 'मैंटल' के ऊपरी और निचले हिस्से को पृथक करने में मुख्य भूमिका निभाता है।
इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का किया इस्तेमाल
जीओजेड जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंस के शोधकर्ता और इस अध्ययन के सह-लेखक रिचर्ड विर्थ ने कहा, 'चंद्रमा के उल्कापिंड के नमूनों के माइक्रोस्ट्रक्चर की जांच के लिए हमने ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का इस्तेमाल किया।' उन्होंने कहा कि नए खनिज का नाम चंद्र भूविज्ञानी डॉन विलहम्स के सम्मान में रखा गया है, जो एक अमेरिकी विज्ञानी थे और अपोलो अंतरिक्ष मिशनों के लिए लैंडिंग साइट के चयन में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी। इस मिशन के जरिये पहली बार पृथ्वी पर चंद्रमा के नमूने लाए गए थे।
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