होम 42 शहरों में प्रदूषण से निपटने को 2200 करोड़ फंड पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

समाचारराजनीति Alert Star Digital Team Nov 3, 2020 08:14 PM

42 शहरों में प्रदूषण से निपटने को 2200 करोड़ फंड पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

42 शहरों में प्रदूषण से निपटने को 2200 करोड़ फंड पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

42 शहरों में प्रदूषण से निपटने को 2200 करोड़ फंड पर विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

देश में पर्यावरण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है. दिल्‍ली-एनसीआर सहित अन्‍य राज्‍यों के कई शहरों में हवा की गुणवत्‍ता बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई है. जबकि कई जगहों पर हालात गंभीर हैं. जिससे इन शहरों में सांस लेना भी मुश्किल होता जा रहा है. हवा की गुणवत्‍ता को सुधारने के लिए केंद्र सरकार सहित राज्‍य सरकारें तमाम हथकंडे अपना रही हैं साथ ही फंड भी जारी कर रही हैं.

सोमवार को ही केंद्रीय वित्‍त मंत्रालय ने पांचवे वित्‍त आयोग की सिफारिशों को स्‍वीकार करते हुए हवा की गुणवत्‍ता सुधारने के लिए राज्‍यों के लिए 2200 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है. इस राशि से फंड पाने वालों में 15 राज्‍यों के 42 शहरों को शामिल किया गया है. इसे शहरों की स्‍थानीय निकाय वायु प्रदूषण घटाने के कामों में खर्च कर सकेंगी. हालांकि इस राशि को मंजूरी मिलने के बाद पर्यावरण विशेषज्ञ इस पर तमाम सवाल उठा रहे हैं.

पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि सरकार पिछले कई सालों से प्रदूषण से संबंधित एजेंसियों को फंड जारी कर रही है. इसके बावजूद पर्यावरण पर फंड बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्‍तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है. हवा की गुणवत्‍ता खराब होती जा रही है. पर्यावरण पर खर्च किया जाने वाले फंड के बढ़ने के बावजूद हालात ठी‍क होने के बजाय खराब होते जा रहे हैं.

पर्यावरणविद् एन शिवकुमार कहते हैं कि सरकारें फंड जारी कर देती हैं. लेकिन ये जिन एजेंसियों के लिए फंड जारी करती हैं ये एजेंसियां सिर्फ प्रदूषण की निगरानी करती हैं. ये प्रदूषण को खत्‍म करने पर काम नहीं करतीं. राष्‍ट्रीय के अलावा सभी राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को देखें तो हवा की गुणवत्‍ता को मापने, नियंत्रण के लिए सिफारिशें व योजनाएं बनाने और निगरानी के काम करने के अलावा ऐसे काम बहुत कम हैं कि ये प्रदूषण को पैदा होने से रोकने को लेकर काम करें. सरकार की ओर से अभी 2200 करोड़ नहीं बल्कि हर साल पैसा दिया जा रहा है.केंद्र सरकार की तरफ से राष्‍ट्रीय वायु गुणवत्‍ता निगरानी कार्यक्रम के तहत बड़ी मात्रा में फंड राज्‍यों को दिया जा रहा है. पिछले चार सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2017-18 में सबसे ज्‍यादा तकरीबन 45 करोड़, 77 लाख रुपये राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिए गए थे. इसके बाद 2018-19 में भी 12,93,43,168 रुपये एसपीसीबी को दिए गए. बता दें कि साल 2014-15, 2015-16 और 2016-17 में भी करीब छह-छह करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था. मध्‍य प्रदेश सहित मिजोरम, चंडीगढ़, पुडुचेरी, महाराष्‍ट्र और नगालैंड को पिछले तीन सालों से लगातार फंड दिया जा रहा है. वहीं उत्‍तर प्रदेश की बात करें तो 2013 में यूपी को तीन करोड़ रूपये से ज्‍यादा का फंड दिया गया था. राज्‍यों के अलावा आईआईटी कानपुर भी पर्यावरण के लिए फंड पाने वालों में शामिल है.

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)