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पाकिस्तान: सेना के ख़िलाफ़ नवाज़ शरीफ़ इतने आक्रामक क्यों हैं?
"कारगिल में हमारे सैकड़ों जांबाज़ों को शहीद करवाने और दुनिया भर में पाकिस्तान को रुस्वा करने का फ़ैसला फ़ौज का नहीं था, चंद जनरलों का था. उन लोगों ने न सिर्फ़ फ़ौज को, बल्कि मुल्क को ऐसी जगह जंग में झोंक दिया, जिसका कोई फ़ायदा हासिल हो ही नहीं सकता था. वो लम्हा मेरे लिए बहुत ही तकलीफ़देह था, जब मुझे पता चला कि हमारे बहादुर सिपाही ये दुहाई देते रहे कि उन दूर दराज़ चोटियों पर खाना नहीं भिजवा सकते तो कम से कम हथियार तो भिजवाएँ. कारगिल जंग के पीछे वही लोग थे, जिन्होंने 12 अक्तूबर 1999 को बग़ावत की. ये परवेज़ मुशर्रफ़ और उनके कुछ साथी थे, जिन्होंने फ़ौज का अपनी सियासत के लिए इस्तेमाल किया और बदनाम किया."
ये शब्द पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के हैं. वे रविवार को क्वेटा में पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) की तीसरी रैली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए संबोधित कर रहे थे.
20 सितंबर को पाकिस्तान की सभी विपक्षी पार्टियों ने इस्लामाबाद में मिलकर पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) का गठन किया था और इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की थी.
अपने भाषण में नवाज़ शरीफ़ ने केवल जनरल मुशर्रफ़ पर ही निशाना नहीं साधा. उन्होंने पाकिस्तानी फ़ौज प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा और आईएसआई चीफ़ जनरल फ़ैज़ हमीद पर भी आरोप लगाए.
उन्होंने कहा, "जनरल बाजवा साहब, आपको साल 2018 के इलेक्शन में पाकिस्तान की तारीख़ की सबसे बड़ी धांधली और अवाम के मैंडेट की चोरी का हिसाब देना है."
नवाज़ शरीफ़ ने कहा, "तबाही और बर्बादी के इल्ज़ाम के छींटे पाकिस्तानी फ़ौज के जवानों और अफ़सरों की वर्दी पर न पड़ें, इसलिए वो इसके लिए सभी ज़िम्मेदार किरदारों का नाम ले रहे हैं. आज तमाम सवालों के जवाब फ़ौज को नहीं, जनरल क़मर जावेद बाजवा और जनरल फैज़ हमीद को देने हैं."
फ़िलहाल क्वेटा रैली के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान या पाकिस्तान की सेना की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पीडीएम की पहली रैली में सेना प्रमुख पर हमले को लेकर उन्होंने कहा था कि ये हमला सेना प्रमुख पर नहीं, बल्कि सेना पर है.
नवाज़ शरीफ़ ने जिस अंदाज़ में पिछली तीन रैलियों में पाकिस्तानी फ़ौज के बारे में मोर्चा खोला है, वो बिल्कुल नया है.
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