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देवपंचाग के अनुसार 11 अगस्त मंगलवार को ही है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का देशभर में विशेष महत्व है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। भगवान श्रीकृष्ण को हरि विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। देश के सभी राज्यों में इस त्योहार को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। इस दिन बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी अपने आराध्य के जन्म की खुशी में दिन भर व्रत रखते हैं और कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हैं, वहीं मंदिरों में झांकियां निकाली जाती हैं। हालांकि इस बार कोरोना वायरस की महामारी के कारण देशभर के मंदिरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सिर्फ पूजा होगी लेकिन भक्तों का जमावड़ा नहीं लगेगा।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार भी दो तिथियों पर पड़ रहा है। दरअसल अष्टमी तिथि का प्रारम्भ 11 अगस्त 2020 को प्रातः 9 बजकर 6 मिनट से हो रहा है और 12 अगस्त 2020 को 11 बजकर 15 मिनट पर अष्टमी तिथि का समापन होगा। मान्यता है कि जब भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व दो अलग-अलग तिथियों पर आता है तो पहले दिन स्मार्त सम्प्रदाय और दूसरे दिन वैष्णव सम्प्रदाय के लोग व्रत तथा पूजन करते हैं।
जन्माष्टमी व्रत 11 या 12रायपुर के प्राचीन आदि शक्ति महामाया मन्दिर के पुजारी पण्डित मनोज शुक्ला बताते हैं कि स्मार्त जन अर्ध्दरात्री को जब अष्टमी तिथि पड रही हो तो उसी दिन जन्माष्टमी मनाते है । जबकी वैष्णव जन उदया तिथी को जन्माष्टमी मनाते हैं। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत 11 अगस्त दिन मंगलवार को शास्त्रो के प्रमाणो के आधार पर ग्राहय है! यद्यपि श्री कृष्ण जी का जन्म भाद्र मास कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि दिन बुधवार को माना गया है, परन्तु किसी पर्व में नक्षत्र और दिन संयोग मात्र होता है। देवी देवताओ के जन्मोत्सव व्रत तिथि के नाम पर मनाया जाता है नक्षत्र के नाम पर नही। रायपुर से प्रकाशित देवपंचाग के अनुसार 11 अगस्त मंगलवार को अष्टमी तिथि प्रातः 09.:06 प्रारंभ होगा जो कि 12 अगस्त बुधवार को प्रातः 11:16 मिनट मे समाप्त होगा, इसके बाद नवमी तिथि लग जायेगी,! 11 अगस्त मंगलवार को यद्यपि उदयकाल मे अष्टमी तिथि नहीं है, परन्तु श्री कृष्ण के जन्म समय मध्य रात्रि मे अष्टमी तिथि थी।
अब यह देखना है कि कोई भी व्रत दो दिनो का है जैसे स्मार्तानाम और वैष्णवानाम, तो दो दिनो मे से किस दिन व्रत हमारे लिए मान्य है तो इस संदर्भ मे ज्योतिष मे कहा गया है कि -
- नभस्यमासे त्वसिताष्टमी या, जन्माष्टमी तां समुदाहरन्ती,
सा चार्धरात्राभिगता विधेया,
निशीथ योगादु भयोः परैव!
यदि जन्माष्टमी व्रत दो दिन का है और दोनों दिन अर्धरात्रि में है तो दूसरे दिन का व्रत ही रखा जाना चाहिए परंतु इस साल वर्तमान मे 12 अगस्त को अष्टमी तिथि अर्धरात्रि व्यापनी नहीं है दोपहर से पूर्व ही समाप्त हो रहा है इसलिये मान्य नहीं होगा!
अतः दिनांक 11 अगस्त 2020 दिन मंगलवार को ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत शास्त्र सम्मत है!
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