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यूं ही श्रीराम का नाम नहीं जपने लगी कांग्रेस, श्रीराम के बिना बेड़ा पार होने वाला नहीं
श्रीराम की माया अपरंपार है। जो कभी न होता, वह श्रीराम कराते हैं। सबल हो या निर्बल, सबके तारणहार श्रीराम ही हैं। शायद यह उक्ति अब कांग्रेस के नेता समझने लगे हैं। खासकर मध्य प्रदेश में कांग्रेस को समझ में आने लगा है कि श्रीराम के बिना बेड़ा पार होने वाला नहीं है। यही कारण है कि कांग्रेस राममय होने लगी है। अपने पारंपरिक आग्रहों को छोड़कर पहली बार कांग्रेस श्रीराम नाम का जाप करने में खुद को आगे दिखाने का उपक्रम कर रही है।
राम की शरण में गए बिना बेड़ा पार होने वाला नहीं
कांग्रेस में यह बदलाव अनायास नहीं आया है। सामाजिक व्यवस्था के साथ सियासत में भी कांग्रेस श्रीराम के प्रयोग और उनके विरोध का फल देख चुकी है। शायद उसके नेता समझने लगे हैं कि जो श्रीराम समतामूलक व्यवस्था के आदर्श हैं, उनकी शरण में गए बिना बेड़ा पार होने वाला नहीं है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर की आधारशिला रखे जाने को लेकर जनमानस में आए भावनाओं के उफान ने कांग्रेस को इस तरह बेचैन किया कि उन्हें श्रीराम याद आने लगे। उसके नेताओं को श्रीराम से दूरी बनाए रखना अब नागवार लगने लगा है।
कांग्रेस में श्रीराम को अपनाने की धारणा को लेकर कमल नाथ सबसे पहले सामने आए
पार्टी में इस धारणा को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ सबसे पहले सामने आए हैं। उन्होंने श्रीराम को अपनाने के नाम पर सारे जतन शुरू किए। आनन फानन में कमल नाथ ने ट्वीट करके घोषणा की कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कार्यकर्ता श्रीराम मंदिर की आधारशिला रखे जाने की पूर्व संध्या पर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। उन्होंने अपने घर पर हनुमान चालीसा के पाठ का आयोजन किया, जिसमें अनेक विधायक एवं पदाधिकारी भी शामिल हुए। परंपरा के अनुसार अयोध्या में राम जन्मभूमि का दर्शन करने से पहले भक्त हनुमान का दर्शन-पूजन करते हैं।
रामभक्त कमल नाथ का कांग्रेसियों ने किया अनुसरण
ककमल नाथ ने भी श्रीराम से पहले हनुमान की आराधना की चली आ रही परंपरा से खुद को जोड़कर यह दिखाने का प्रयास किया कि वह भी बड़े रामभक्त हैं। राज्य भर में कांग्रेसियों ने कमल नाथ का अनुसरण करते हुए इस आयोजन के जरिये खुद को रामभक्त साबित करने की कोशिश की। कमल नाथ के हनुमान चालीसा पाठ के साथ ही प्रियंका गांधी सहित अनेक नेताओं ने श्रीराम को लेकर अपना मत जाहिर किया। श्रीराम के बारे में प्रियंका के बाद राहुल गांधी के बयान ने एक तरह से मध्य प्रदेश कांग्रेस को नई उम्मीद दे दी।
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