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यूपी में कोरोनाः नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं लखनऊ में हालात?
लखनऊ के चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए स्वीकार किया कि राजधानी के अस्पतालों में 'बिस्तरों की थोड़ी कमी तो है.'
राजेंद्र प्रसाद ने रविवार को ही सीएमओ का कार्यभार संभाला है और उनका कहना है कि वो 'चुनौतीपूर्ण हालात से निबटने के लिए हर संभव कोशिश और तैयारी कर रहे हैं.'
प्रशासन ने कोरोना से लड़ने के लिए कई स्तर पर पहल की है. लेकिन अभी तक बहुत कामयाबी नहीं मिल सकी है.
प्रशासन ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सप्ताहांत का लॉकडाउन लागू किया है. साथ ही कंटेनमेंट ज़ोन बनाए हैं. इसके अलावा लखनऊ के चार थानों इंदिरानगर, गाज़ीपुर, सरोजनी नगर और आशियाना क्षेत्र में 20 जुलाई से 27 जुलाई के बीच एक सप्ताह का पूर्ण लॉकडाउन भी लगाया था. इसके अलावा तीन और थाना क्षेत्रों में पूर्ण लॉकडाउन लगाने पर भी विचार किया गया है. प्रशासन ने लखनऊ में टेस्टिंग भी तेज़ की है. अब औसतन प्रतिदिन पाँच हज़ार से अधिक टेस्ट लखनऊ में हो रहे हैं. ज़िला प्रशासन के अनुसार अब तक एक लाख 30 हज़ार टेस्ट हो चुके हैं.
हज हाउस को एक हज़ार बेड का अस्पताल भी बना दिया गया है.
हाल ही में समाचार चैनल भारत समाचार के पत्रकार वीरेंद्र सिंह की एक रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसमें उन्होंने लखनऊ की स्वास्थ्य सेवाओं की आंखों देखी बयान की थी.
वीरेंद्र सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, 'कोरोना से हालात बेक़ाबू हैं, दावे बड़े-बड़े किए जा रहे हैं लेकिन रिज़ल्ट ज़ीरो है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लोगों को बेड नहीं मिल पा रहे हैं. ज़िलाधिकारी लोगों का फ़ोन नहीं उठाते हैं. मरीज़ों को आठ-आठ घंटे एंबुलेंसों में बिठाकर अस्पतालों में घुमाया जाता है लेकिन बिस्तर नहीं मिलते हैं.'
लखनऊ में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या स्थिति है ये जानकारी लेने के लिए हमने भी लखनऊ के ज़िलाधिकारी से संपर्क करने की कई बार कोशिश की लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका.
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