होम न्यूज मैनेज करके कोरोना के खिलाफ नहीं लड़ी जा सकती लड़ाई : प्रियंका गांधी वाड्रा

समाचारखेल Alert Star Digital Team Jul 25, 2020 08:25 PM

न्यूज मैनेज करके कोरोना के खिलाफ नहीं लड़ी जा सकती लड़ाई : प्रियंका गांधी वाड्रा

न्यूज मैनेज करके कोरोना के खिलाफ नहीं लड़ी जा सकती लड़ाई : प्रियंका गांधी वाड्रा

 न्यूज मैनेज करके कोरोना के खिलाफ नहीं लड़ी जा सकती लड़ाई : प्रियंका गांधी वाड्रा

कांग्रेस महासचिव एवं उ.प्र. की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कोरोना माहमारी की विस्फोटक स्थिति और सरकारी लापरवाहियों के संदर्भ में पत्र लिखा है। पत्र में प्रियंका ने लिखा है कि यूपी में कल कोरोना के 2500 केस आए और लगभग सभी महानगरों में कोरोना मामलों की बाढ़ सी आई है। अब तो गाँव देहात भी इससे अछूते नहीं है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि स्थितियाँ गंभीर होती जा रही हैं। आपसे आग्रह करती हूँ कि सिर्फ प्रचार और न्यूज मैनेज करके ये लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है।
प्रियंका ने अपने पत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने लिखा है कि साफ प्रतीत होता है कि आपकी सरकार ने 'नो टेस्ट = नो कोरोना' को मंत्र मानकर लो टेस्टिंग की पॉलिसी अपना रखी है। अब एकदम से कोरोना मामलों के विस्फोट की स्थिति है। जब तक पारदर्शी तरीके से टेस्ट नहीं बढ़ाए जाएँगे तब तक लड़ाई अधूरी रहेगी व स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
प्रियंका ने लिखा है कि यूपी में क्वारंटीन सेंटर और अस्पतालों की स्थिति बड़ी दयनीय है। कई जगह की स्थिति इतनी खराब है कि लोग कोरोना से नहीं अपितु सरकार की व्यवस्था से डर रहे हैं। इसी कारण लोग टेस्ट के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। ये सरकार की बड़ी विफलता है। कोरोना का डर दिखाकर पूरे तंत्र में भ्रष्टाचार भी पनप रहा है। जिस पर अगर समय रहते लगाम न कसी गई तो कोरोना की लड़ाई विपदा में बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि आपकी सरकार ने दावा किया था कि 1.5 लाख बेड की व्यवस्था है लेकिन लगभग 20,000 सक्रिय संक्रमित केस आने पर ही बेडों को लेकर मारामारी मच गई है।
प्रियंका ने लिखा है कि अगर अस्पतालों के सामने भयंकर भीड़ है तो मैं यह नहीं समझ पा रही हूँ कि यूपी सरकार मुंबई और दिल्ली की तर्ज पर अस्थाई अस्पताल क्यों नहीं बनवा रही है? चिकित्सीय सुविधा पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। प्रधानमंत्री बनारस के सांसद हैं और रक्षामंत्री लखनऊ के, अन्य भी कई केंद्रीय मंत्री उ.प्र. से हैं। आखिर बनारस, लखनऊ, आगरा आदि में अस्थाई अस्पताल क्यों नहीं खोले जा सकते? डीआरडीओ, सेना और पैरा मिलिटरी द्वारा अस्थाई अस्पतालों का संचालन किया जा सकता है। या आवश्यकता हो तो डीआरडीओ के अस्पताल को लखनऊ लाया जा सकता है। साथ ही दिल्ली में स्थापित केंद्रीय सुविधाओं का प्रयोग सीमवर्ती जिलों के लिए भी किया जा सकता है। वहाँ के अस्पतालों का अधिकतम उपयोग अभी नहीं हो पा रहा है।
प्रियंका ने लिखा है कि होम आइसोलेशन एक अच्छा कदम है परंतु इसे भी आनन-फानन में आधा अधूरा लागू नहीं किया जाए। इसे लागू करते समय कुछ बिंदुओं पर सुचिंतित निर्णय किए जाने चाहिए, जिनमें मरीजों की मॉनिटरिंग और सर्विलांस की क्या व्यवस्था होगी? हालत बिगड़ने पर किसे सूचना देनी होगी? होम आइसोलेशन में चिकित्सीय सुविधाओं का खर्च क्या होगा? मरीजों के टेम्प्रेचर और ऑक्सिजन लेवल चेक करने की व्यवस्था क्या होगी? सरकार को इसकी पूरी मैपिंग करके जनता को स्थानीय स्तर पर सम्पूर्ण जानकारी देनी चाहिए।

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