होम जब भारत ने चांद की तरफ बढ़ाया था अपना दूसरा बड़ा कदम, दुनिया ने माना था लोहा

समाचारदेश Alert Star Digital Team Jul 21, 2020 09:10 PM

जब भारत ने चांद की तरफ बढ़ाया था अपना दूसरा बड़ा कदम, दुनिया ने माना था लोहा

जब भारत ने चांद की तरफ बढ़ाया था अपना दूसरा बड़ा कदम, दुनिया ने माना था लोहा

जब भारत ने चांद की तरफ बढ़ाया था अपना दूसरा बड़ा कदम, दुनिया ने माना था लोहा

भारत के चंद्रयान-2 मिशन को पूरा एक वर्ष हो गया है। ये मिशन केवल एक सपने को सच करने जैसा ही नहीं था बल्कि 130 करोड़ से ज्‍यादा लोगों की उम्‍मीद भी थी। 22 जुलाई 2019 को जब भारत के महाबली कहे जाने वाले रॉकेट जीएसएलवी ने इसके साथ उड़ान भरी तो ये उड़ान देश के हर व्‍यक्ति की उम्‍मीदों की उड़ान भी थी। इसको श्रीहरिकोटा रेंज से भारतीय समयानुसार 02:43 अपराह्न को सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया गया था। इस रॉकेट पर थे चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम और और रोवर प्रज्ञान। जीएसएलवी को यूं तो 15 जुलाई को लॉन्‍च किया जाना था लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के चलते इसकी लॉन्चिंग को टाल दिया गया था। इसको 7 सितंबर की देर रात चांद की सतह पर उतरना था। हर कोई दिल थाम कर उस दिन का इंतजार कर रहा था, जब ये चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करता।

7 सितंबर को हर चीज चरणबद्ध तरीके से हो रही थी। ऑर्बिटर से अलग होकर यान तेजी से चांद की सतह के करीब पहुंच रहा था। इससे तस्‍वीरें मिलने की खुशी में मिशन कंट्रोल रूम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था। चंद्रयान-2 विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवरको चांद के दो गड्ढों (क्रेटर्स)- मंजिनस सी और सिमपेलियस एन के बीच वाले मैदान में लगभग 70° दक्षिणी अक्षांश पर उतरना था। रात के दो बजे थे और ये चांद की सतह से महज दो किमी दूर था तभी अचानक इसका संपर्क मिशन कंट्रोल रूम से टूट गया।

जिस वक्‍त ऐसा हुआ उस समय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई अन्‍य गणमान्‍य लोग वहीं मौजूद थे। इसके अलावा कुछ स्‍कूली बच्‍चे जो इस एतिहासिक पल का गवाह बन रहे थे वो भी वहां पर ही थे। मिशन कंट्रोल रूम में स्‍क्रीन पर बने इसके पाथ से अलग एक लकीर दिखाई दे रही थी जो बता रही थी कि यान रास्‍ता भटक गया है। काफी देर तक वैज्ञानिक इससे संपर्क साधने की कोशिश करते रहे, लेकिन सफल नहीं हो सके। कुछ समय के बाद इसरो की तरफ से कहा गया है कि इस यान की चांद की सतह पर हार्ड लैंडिंग हुई, जिसकी वजह से इसको नुकसान पहुंचा और इसका पता नहीं चल सका।

हर भारतीय के लिए ये पल किसी सपने के टूटने जैसा ही था, लेकिन हर किसी ने अपने देश के वैज्ञानिकों की प्रतीभा को सलाम किया। न सिर्फ भारत के लोगों ने बल्कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों और स्‍पेस एजेंसी ने भारत द्वारा किए गए इस कारनामें की सराहना की। हर किसी ने कहा कि ये मिशन नाकामी के साथ खत्‍म नहीं हुआ है, बल्कि इससे काफी कुछ हासिल हुआ है। दुनिया के ऐसा कहने की कुछ खास वजह भी थीं। दरअसल, भारत की स्‍पेस एजेंसी ने चंद्रयान-2 को चांद दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर एक सॉफ्ट लैंडिंग कराने का जिम्‍मा लिया था। इस तरह का ये भारत का पहला मिशन भी था। दूसरा ये कि ये पूरी तरह से स्‍वदेशी तकनीक पर आधारित था। दुनिया में भारत ऐसा चौथा देश था जिसने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने का जिम्‍मा उठाया था।

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