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व्यापारियों ने भारत को आत्मनिर्भर बनाकर चीन को सबक सिखाने की ठानी
कोरोना ने रक्षाबंधन के त्यौहार को भी नहीं बख्शा है। रक्षाबंधन को लेकर भाई-बहनों में काफी उत्साह है तो वहीं दुकानदारों में भय की स्थिति बनी हुई है। ज्यादात्तर बहनें अपने हाथ से ही रक्षा सूत्र बनाने में जुटी हुई हैं। उधर भारतीय नागरिकों के साथ ही अब व्यापारियों ने भी भारत को आत्मनिर्भर बनाकर चीन को सबक सिखाने को ठान ली है। इसलिए चीनी सामानों की ओर से मुंह मोड़ स्वदेशी पर जोर दे रहे हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से सप्ताह में पांच दिन दुकानें खोलने का आदेश जारी है। इसे लेकर थोक व फुटकर राखी विक्रेताओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि सप्ताह के पांच दिनों में कितना व्यापार होगा और होगा या नहीं, यह सबसे बड़ी मुसीबत है। क्योंकि रक्षाबंधन के पहले दो दिन तक बंदी ही रहेगी। वहीं एक तरफ कोरोना भय से बहनों ने घर में ही भाईयों की कलाई में बांधने के लिए रक्षा सूत्र बना रही हैं।
सिविल लाइन तिराहे पर दुकान लगाकर राखी बेचने वाले पिंटू केशरवानी ने बताया कि कोरोना के चलते व्यापार का तरीका बदल गया है। पिछले साल के अपेक्षा इस वर्ष राखी का व्यापार आधा ही रह गया है। क्योंकि पिछले वर्ष चाइना से भारत में राखियों का व्यापार होता था लेकिन इस वर्ष हम व्यापारियों ने चाइना की राखियों का बहिष्कार कर दिया है। रतन सोनकर ने बताया कि रक्षाबंधन पर सबसे ज्यादा पसंद बच्चों की होती है। रेशम का धागा, जरी राखी, मोती राखी, जर्कन नग राखी, मारवाड़ियों में प्रचलित लुम्बा राखी व बच्चों की पसंद में छोटा भीम, डोरेमोन, सुपरमैन व लाइट जड़ित राखी की मांग ज्यादा रहती है। राखी विक्रेता विजय ने बताया कि सर्वाधिक रेशम धागा से बनी राखी का डिमांड रहता है। इसके अलावा कड़ा राखी, रंग-बिरंगे मोती राखी, चांदी राखी व बच्चों की कार्टून राखी की मांग रहती है। कहा कि कोरोना महामारी ने सभी त्योहारों की रौनक को फीका कर दिया है। इससे हमारे व्यापार में भी बिन मौसम बरसात की तरह ही संकट के बादल छा गए हैं।
छात्रा प्रियका, रूबी गुप्ता, पूजा चौहान, अन्नू प्रजापति आदि ने बताया कि पहले तो हम अपने भाईयों के लिए बाजारों में घूमकर नए-नए प्रकार की राखियां लाते थे, लेकिन इस बार कोरोना के भय से हमने घर में ही राखी बनाई है। जिसे बांधने में मन में किसी प्रकार का भय नहीं रहेगा। बताया कि एक राखी तैयार करने में 30 मिनट का समय लगा। इसकी लागत बाजार की राखियों से कम है। उनकी इस एक राखी बनाने में 20 से 25 रुपये तक की लागत आई है।
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