होम भारत-चीन सीमा विवाद ने बढ़ाई लेह की मुश्किलें

समाचारअर्थ व बाजार Alert Star Digital Team Jun 22, 2020 04:11 PM

भारत-चीन सीमा विवाद ने बढ़ाई लेह की मुश्किलें

भारत-चीन सीमा विवाद ने बढ़ाई लेह की मुश्किलें

भारत-चीन सीमा विवाद ने बढ़ाई लेह की मुश्किलें

लद्दाख के लेह शहर में एक अजीब सा सन्नाटा है. सीमा पर 20 जवानों की मौत के बाद यहां के लोगों में अनिश्चितता की भावना है.

आमतौर पर दुनियाभर के सैलानियों से भरी रहने वाली सड़कें आजकल खाली पड़ी हैं. कोरोना माहामारी का असर यहां साफ़ देखा जा सकता है. लेह एक कम आबादी वाला शहर है.

यहां प्रति वर्ग किलोमीटर में सिर्फ 3 लोग रहते हैं और रविवार तक कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या 212 पहुंच चुकी थी.

सीमा पर भारत-चीन के बढ़ते विवाद ने इलाक़े के लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं.

गुरुवार को लद्दाख बुद्धिस्ट असोसिएशन नाम की एक बौद्ध संस्था ने सीमा पर मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक मार्च निकालने की कोशिश की लेकिन कोविड-19 के लिए लागू नियमों के तहत उन्हें रोक दिया गया.

सड़कें बंद और टेलीफ़ोन लाइन बंद

गलवान घाटी और पैंगोंग इलाके की ओर जाने वाली सड़कें बाहरी लोगों के लिए बंद कर दी गई हैं. मीडिया को भी वहां जाने की इजाज़त नहीं है.

अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंध कोरोना को ध्यान में रखकर लगाए गए हैं. बीजेपी की लेह इकाई के अध्यक्ष डॉर्जी आंगचुक ने बीबीसी को बताया कि मीडिया को आगे जाने से रोका जा रहा है ताकि किसी तरह की अटकलों से बचा जा सके.

गलवान घाटी लेह से क़रीब 250 किलोमीटर दूर है लेकिन घाटी की सही स्थिति के बारे में यहां किसी को जानकारी नहीं है.

एलएसी के आसपास के इलाकों की फ़ोन लाइन भी पिछले कुछ हफ़्तों से बंद हैं.

पीएम के भाषण के बाद भ्रम कि स्थिति

नामग्याल डुरबोक गलवाल घाटी के डुरबोक इलाके में काउंसलर रह चुके हैं. वो 15 दिनों पहले ही अपने गांव से लेह लौटे थे. वो कहते हैं, "अगर वो (चीनी) हमारे इलाके में नहीं घुसे हैं, तो इतनी तादाद में सेना की तैनाती क्यों की जा रही है?"

वो आगे कहते हैं, "पीएम मोदी ने कहा कि कोई घुसपैठ नहीं हुई है, लेकिन हम सब गांव वालों को पता है कि घुसपैठ हुई थी. अगर गलवान घाटी को देखें, तो एक ज़मीन है जहां हमारे घोड़े चरने जाते थे लेकिन अब चीनी उस जगह को कंट्रोल कर रहे हैं, इसका क्या मतलब है?"

लेह बीजेपी के अध्यक्ष आंगचुक कहते हैं, "एलएसी के दोनों तरफ़ सेनाएं गश्ती करती हैं, लेकिन एलएसी कोई खींची हुई रेखा नहीं है, कभी-कभी ग़लती से उनकी सेना हमारे इलाक़े में आ जाती है और हमारी सेना उनकी तरफ़ चली जाती है. ऐसे में दोनों सेनाएं आमने-सामने आ जाती हैं और कई बार झगड़े भी हो जाते हैं. इस बार भी एलएसी पर ही लड़ाई हुई लेकिन चीनी सैनिक हमारे इलाक़े में नहीं घुस पाए"

रिटायर्ट कर्नल सोनम वांगचुक, जिन्होंने पाकिस्तान के ख़िलाफ कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था, बताते हैं, "हमने अपने 20 सैनिक खो दिए, कोई तो विवाद की वजह होगी. इसके अलावा क्या कारण हो सकता है कि हमारे लोगों को जान गंवानी पड़ी? आप उनके इलाके में नहीं घुसे और वो आपके इलाक़े में नहीं आए, तो फिर झगड़ा क्यों हुआ?"

प्रधानमंत्री के बयान पर जब विवाद हुआ तो पीएमओ ने सफ़ाई देते हुए बयान जारी किया जिसमें लिखा था, सर्वदलीय बैठक में जानकारी दी गई कि इस बार काफ़ी अधिक संख्या में चीनी सुरक्षाबल लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के नज़दीक पहुंचे हैं और हमारी सेना इसका अनुरूप जवाब दे रही है.

बयान में आगे बताया गया, "जहां तक एलएसी के उल्लंघन की बात है, साफ़ तौर पर पीएम ने कहा कि 15 जून को गलवान घाटी में हिंसा इसलिए हुई क्योंकि चीनी सैनिक एलएसी के पास कुछ निर्माण कार्य कर रहे थे और उन्होंने इसे रोकने से इनकार कर दिया."

लोगों को रोज़गार की चिंता

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)