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अमेरिका में लगी काले ग्रेनाइट से तैयार की गई भगवान हनुमान की सबसे ऊंची मूर्ति
अमेरिका के डेलावेयर प्रांत में सोमवार को भगवान हनुमान की 25 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित की गई। प्रांत के हॉकेसिन शहर में लगी यह अमेरिका में हनुमान की सबसे ऊंची मूर्ति बताई जा रही है।
भगवान हनुमान की मूर्ति का निर्माण भारत में किया गया
भगवान हनुमान की मूर्ति के निर्माण पर एक लाख डॉलर (करीब 76 लाख रुपये) की लागत आई। इसका निर्माण दक्षिण भारत के वारंगल शहर में किया गया। यह मूर्ति काले ग्रेनाइट से तैयार की गई है। इसका वजन 30 हजार किलोग्राम से ज्यादा है। भगवान हनुमान की यह विशाल मूर्ति गत जनवरी में मालवाहक पोत के जरिये हैदराबाद से न्यूयॉर्क लाई गई थी। इसके बाद ट्रक से डेलावेयर पहुंचाई गई थी।
मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा और अनुष्ठानों के लिए बेंगलुरु से पुजारी पहुंचे, कोरोना के चलते भीड़ नहीं हुई
मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा और अनुष्ठानों के लिए बेंगलुरु से पुजारी नागराज भट्टर भी हॉकेसिन पहुंचे। डेलावेयर हिंदू मंदिर संगठन के अध्यक्ष पाटीबंद शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते मूर्ति स्थापना के दौरान ज्यादा लोगों का जमावड़ा नहीं लगा। उन्होंने कहा कि मूर्ति स्थापना के बाद अब हिंदू समुदाय के लोगों को जत्थों में आमंत्रित किया जाएगा। यह मंदिर सभी समुदायों के लिए खुला रहेगा।
भगवान विष्णु की सबसे ऊंची मूर्ति भारत में नहीं बल्कि इंडोनेशिया में मौजूद है
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को धरती का पालनहार माना जाता है। भारत में विभिन्न हिस्सों में भगवान विष्णु को अलग-अलग नामों से जाना जाता है और उनकी पूजा होती है। देश भर के मंदिरों में भगवान विष्णु की मूर्तियां भी मौजूद हैं। अगर आप किसी से पूछते हैं कि बताओ भगवान विष्णु की सबसे ऊंची मूर्ति कहां है? तो आपको भारत के किसी मंदिर का नाम सुनने को मिलेगा। हालांकि यह सही नहीं है। भगवान विष्णु की सबसे ऊंची मूर्ति भारत में नहीं बल्कि इंडोनेशिया में मौजूद है।
बाली द्वीप पर मौजूद है प्रतिमा
अब बात भगवान विष्णु की सबसे ऊंची प्रतिमा की, तो यह मूर्ति इंडोनेशिया के सबसे फेमस टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स में से एक बाली द्वीप पर मौजूद है। बाली द्वीप के गरुड़ विष्णु केचना कल्चरल पार्क में मौजूद यह मूर्ति करीब 122 फुट ऊंची और 64 फुट चौड़ी है। तांबे और पीतल से निर्मित इस मूर्ति को बनाने में लगभग 28 साल का समय लगा है और साल 2018 में बनकर तैयार हुई है। इंडोनेशिया के फेमस मूर्तिकार न्यूमन नुआर्ता ने इस मूर्ति को बनाया है।
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