होम कुदरत ने बदला रंग, अंटार्कटिका में सफेद से हरे रंग के हुए बर्फ के पहाड़
कुदरत ने बदला रंग, अंटार्कटिका में सफेद से हरे रंग के हुए बर्फ के पहाड़
बदलते वक्त के साथ कुदरत ने भी अपना रंग बदलना शुरू कर दिया है. पहले अंटार्कटिका (Antarctica) सफेद बर्फ (white snow) के पहाड़ों से घिरा नजर आता था, अब सफेद रंग के बर्फ हरे रंग (green snow) में बदल गए हैं. अंटार्कटिका में अब हरे रंग के बर्फ के पहाड़ नजर आ रहे हैं. अंटार्कटिका में बर्फ के पहाड़ तेजी से अपना रंग बदलते हुए हरे रंग के होते जा रहे हैं.
अंटाकर्टिका के बर्फ के पहाड़ों की खूबसूरती देखते ही बनती है. बर्फ के पहाड़ों का सफेद से हरे रंग में बदलते जाना हैरान करने वाला है. वैज्ञानिकों ने इसको लेकर चिंता जाहिर की है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा पर्यावरण में आए बदलाव की वजह से हो रहा है. क्लाइमेट चेंज की वजह से बर्फ का रंग सफेद से हरे रंग का हो रहा है.
ये बदलाव इतना बड़ा है स्पेस से भी इसे देखा जा सकता है. बुधवार को छपी एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है.
शैवाल की वजह से बदल रहा है रंगवैज्ञानिकों का कहना है कि सफेद रंग के बर्फ के पहाड़ों का हरे रंग में बदलना शैवाल की वजह से हो सकता है. अंटार्कटिका में काफी वक्त से शैवाल मौजूद हैं. वैज्ञानिक बता रहे हैं कि शैवाल अब इतनी अधिक मात्रा में हो गए हैं कि बर्फ का रंग सफेद से बदलकर हरा होने लगा है. ब्रिटिश खोजकर्ता अर्नेस्ट शैकेलटन ने इस बारे में जानकारी दी है.
यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने सेंटीनल 2 सैटेलाइट के जरिए 2 वर्षों का डाटा जमा किया है. अंटार्कटिका की सतह का विश्लेषण किया गया है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज और ब्रिटिश अंटार्कटिका सर्वे ने साथ मिलकर एक मैप बनाया है. इस मैप में शैवाल के तेजी से बढ़ने का पता चलता है. खासकर अंटार्कटिका पेनिनसुला तट पर इसकी मात्रा ज्यादा पाई गई है.
हरे रंग के साथ लाल और नारंगी रंग के भी शैवाल
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने बताया है कि वो इस बात की जांच कर रहे हैं कि शैवाल कहां से बढ़ रहे हैं और क्या भविष्य में ये और ज्यादा तेजी से बढ़ सकते हैं.
शैवाल की खासियत होती है कि वो वातावरण से कार्बन डाइक्साइड को सोख लेते हैं. वैज्ञानिक बता रहे हैं कि इसका सीधा मतलब है कि इस इलाके में कार्बन का उत्सर्जन बढ़ा है. उनका कहना है कि इस इलाके में यूके के पेट्रोल कारों के सफर की वजह से कार्बन का उत्सर्जन काफी बढ़ा है.
वैज्ञानिक सिर्फ हरे रंग की नहीं बल्कि लाल और नारंगी रंग के शैवाल पर भी रिसर्च कर रहे हैं. हालांकि ये स्पेस से दिखाई नहीं देता है.
Leave A comment
महत्वपूर्ण सूचना -
भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।