होम कोरोना महामारी के बीच क्या कश्मीर में बढ़ रहे हैं चरमपंथी हमले?
कोरोना महामारी के बीच क्या कश्मीर में बढ़ रहे हैं चरमपंथी हमले?
3 मई 2020 को भारतीय सेना के एक कर्नल, मेजर और जम्मू और कश्मीर पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर समेत सुरक्षा बलों के पांच लोग एक मुठभेड़ में मारे गए.
यह मुठभेड़ भारत प्रशासित कश्मीर के उत्तरी हिस्से में हंदवाड़ा में हुई जो कि कुपवाड़ा जिले में आता है. इस मुठभेड़ में दो चरमपंथी भी मारे गए.
यह एनकाउंटर शनिवार दोपहर को शुरू हुआ था. पुलिस के बयान में कहा गया है कि सुरक्षा बलों को इंटेलिजेंस सूत्रों से जानकारी मिली थी कि इस इलाके में चरमपंथी मौजूद हैं.
21 आरआर के सीओ थे कर्नल आशुतोष शर्मा
हंदवाड़ा में हुए एनकाउंटर में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की 21वीं बटालियन के कमांडिंग अफ़सर (सीओ) कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश, लांस नायक दिनेश के साथ जम्मू कश्मीर पुलिस के सब-इंस्पेक्टर काज़ी पठान की मौत हो गई.
कर्नल शर्मा को दो बार वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका था.
कर्नल आशुतोष शर्मा के बड़े भाई पीयूष ने पीटीआई को बताया कि 13वें प्रयास में सफलता हासिल करने तक वे सेना में शामिल होने के लिए जी-जान से जुटे रहे थे. कर्नल शर्मा अपने बड़े भाई पीयूष से 3 साल छोटे थे. वह 2000 के दशक शुरुआत में आर्मी में शामिल हुए थे.
कर्नल आशुतोष शर्मा का परिवार उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला है. लेकिन, फिलहाल उनका परिवार जयपुर में रह रहा था. सोमवार को यहीं पर उनका शव पहुंचेगा और जयपुर में ही उनका अंतिम संस्कार होगा.
पुलिस के मुताबिक़, मारे गए एक चरमपंथी की पहचान लश्करे तैबा के कमांडर हैदर के तौर पर की गई है जो कि पाकिस्तान का रहने वाला था.
हाल में केरन सेक्टर में मारे गए थे पैरा एसएफ के 5 जवान
हंदवाड़ा एनकाउंटर के चंद दिनों पहले ही आर्मी ने केरन सेक्टर में लाइन ऑफ़ कंट्रोल (एलओसी) के पास घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया था.
इस दौरान हुई मुठभेड़ में पांच चरमपंथी मारे गए. हालांकि, इस एक्शन में आर्मी की पैरा स्पेशल फोर्स यूनिट के पांच जवान भी मारे गए थे.
आर्मी के बयान में कहा गया था कि इस मुठभेड़ में भारी हथियारों के साथ आए पांच घुसपैठिये भी मारे गए.
पुलिस के दावे के मुताबिक़, कोरोना वायरस की महामारी के बीच अप्रैल में ही अलग-अलग मुठभेड़ों में कश्मीर में 28 चरमपंथी मारे गए.
एलओसी पर केरन सेक्टर में हुई घटना को छोड़ दिया जाए तो अप्रैल में हुए कुल 20 एनकाउंटरों में सुरक्षाबलों से जुड़े किसी भी जवान या अफसर की जान नहीं गई.
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