होम कोरोना को मात देने में रामबाण साबित होगी ये दवा? मरीजों में दिखने लगा सुधार, अचानक बढ़ गई मांग

समाचारराजनीति Alert Star Digital Team Apr 17, 2020 02:16 PM

कोरोना को मात देने में रामबाण साबित होगी ये दवा? मरीजों में दिखने लगा सुधार, अचानक बढ़ गई मांग

कोरोना को मात देने में रामबाण साबित होगी ये दवा? मरीजों में दिखने लगा सुधार, अचानक बढ़ गई मांग

कोरोना को मात देने में रामबाण साबित होगी ये दवा? मरीजों में दिखने लगा सुधार, अचानक बढ़ गई मांग

कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की टीम दिन रात मेहनत कर रही है। कई वैक्सीन भी तैयार हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि ये वैक्सीन कोरोना पर काबू पा सकती है। हालांकि दवा खोजने की प्रक्रिया अभी भी जारी है। कोरोनो वायरस की प्रामाणिक दवा अब तक नहीं बन पाई है। दुनिया भर में इस महामारी से बीमार और मरने वालों के आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में रेमडेसिवीर को COVID-19 संक्रमण के उपचार में बहुत कारगर माना जा रहा है। इस दवा पर अमेरिका की हेल्थ न्यूज वेबसाइट Stat की रिपोर्ट द्वारा बताए गए निष्कर्ष आशाजनक हैं, लेकिन यह क्लीनिकल परीक्षण डेटा पर आधारित नहीं हैं।

रेमडेसिवीर दवा दिखाने लगी असर!

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो मेडिसिन के शोधकर्ताओं का कहना है कि COVID-19 के 125 मरीजों को रेमडेसिवीर दवा देने के बाद उनकी सेहत में तेजी से सुधार देखा गया है। दवा की शुरुआती सफलता को देखते हुए इसकी मांग भी बढ़ गई है। रेमडेसिवीर दवा का इस्तेमाल इबोला के उपचार में किया गया था। आपको बता दें अमेरिका की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Gilead Sciences की तरफ से रेमडेसिवीर दवा का क्लीनिकल परीक्षण किया जा रहा है और इसे प्रायोगिक दवा के oaतौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

दो चरणों में हो रहा है मरीजों का इलाज

हेल्थ न्यूज वेबसाइट Stat के अनुसार, शिकागो विश्वविद्यालय में COVID-19 का इलाज करा रहे 125 मरीजों ने दो चरणों में 3 क्लीनिकल परीक्षण में हिस्सा लिया। इस परीक्षण का आयोजन Gilead द्वारा किया गया था। इनमें से 113 मरीजों में कोरोना के गंभीर लक्षण थे। Stat का कहना है कि इस परीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग उनके पास है। इस वीडियो में शिकागो विश्वविद्यालय के सदस्य आपस में चर्चा करते दिख रहे हैं, जिसमें एक फिजिशियन का कहना है कि रेमडेसिवीर दवा लेने के बाद कुछ लोगों का बुखार कम हुआ और कुछ लोगों को वेंटिलेटर से हटा दिया गया।

रेमडेसिवीर का एक परीक्षण उन 2,400 लोगों पर किया जा रहा है, जिनमें कोरोना के गंभीर लक्षण हैं जबकि दूसरा परीक्षण उन 1,600 मरीजों पर किया जा रहा है जिनमें कोरोना के मामूली लक्षण हैं। यह दोनों परीक्षण दुनिया भर में कई जगहों पर किए जा रहे हैं। ClinicalTrials.gov के अनुसार, यह दोनों परीक्षण मार्च में शुरू हुए थे और उम्मीद है कि मई तक इन्हें पूरा कर लिया जाएगा।

अमेरिका की हेल्थ न्यूज वेबसाइट क्या कहती है?

Stat न्यूज के इस बयान पर Gilead ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'स्टडीज से आ रही डेटा के प्रति हम आशान्वित हैं'। कुछ दिनों पहले Gilead की तरफ से एक छोटा सा क्लीनिकल डेटा जारी किया गया था। इसके अनुसार अस्पताल में भर्ती 53 मरीजों में से 68 फीसदी, जिन्हें रेमडेसिवीर दवा की उचित मात्रा दी गई, उनमें सुधार देखने को मिला। उस समय, विश्लेषक जे।पी। मॉर्गन ने डेटा को आशावादी बताया था लेकिन साथ ही इसके परिणामों पर भी नजर रखने की चेतावनी दी थी।

भारत में इस दवा के इस्तेमाल को लेकर ICMR कर रहा है विचार

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भी कहा था कि वह कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज में रेमडेसिवीर दवा का उपयोग करने पर विचार करेगी। हालांकि, इसका निर्णय तभी लिया जा सकेगा, जब घरेलू कंपनियां इस दवा का उत्पादन करें। ICMR के प्रमुख वैज्ञानिक रमन गंगाखेडकर ने कहा था, 'एक स्टडी के शुरुआती डेटा से पता चलता है कि यह दवा प्रभावी है। हम WHO के नतीजों का इंतजार करेंगे और गे कि क्या कुछ कंपनियां भी इस पर आगे काम कर सकती हैं।'

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