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काम न आई चीन की सिफारिश, FATF ने दी PAK को ब्लैकलिस्ट करने वॉर्निंग
पाकिस्तान एक बार फिर चीन की मदद के चलते फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ब्लैकलिस्ट में जाने से बच गया है. सूत्रों के मुताबिक, एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 'ग्रे सूची' में बरकरार रखने का फैसला किया है.
हालांकि, एफएटीएफ ने टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है. साथ ही पाकिस्तान से इस पर पूरी तरह लगाम लगाने को कहा है.
चीन के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस मसले पर एक ट्वीट किया गया है. इसमें कहा गया है, 'पाकिस्तान की सरकार ने आतंकवादी संगठनों को पहुंचाई जाने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाने में भारी प्रयास किए हैं, जिसे पेरिस में हुए बैठक में FATF के अधिकांश सदस्यों द्वारा मान्यता दी गई है. चीन और अन्य देश इस क्षेत्र में पाकिस्तान को सहायता देना जारी रखेंगे.'
एफएटीएफ ने 27 बिंदुओं वाले एक्शन प्लान को पूरी तरह से लागू करने के लिए अक्टूबर तक का समय पाकिस्तान को देने पर सहमति जताई है. सूत्रों के मुताबिक, 27 बिंदुओं वाले एक्शन प्लान पर पाकिस्तान की ओर से पेश किए गए विस्तृत प्रगति रिपोर्ट की एफएटीएफ ने समीक्षा की.
एफएटीएफ ने पाकिस्तान को 13 बिंदुओं का पूरी तरह से पालन करने के लिए अक्टूबर 2020 तक का अतिरिक्त समय दिया है. पाकिस्तान अब तक चीन, तुर्की, मलेशिया, सऊदी अरब और मध्य पूर्वी देशों के राजनयिक समर्थन के कारण ब्लैकलिस्ट से बचने में सफल रहा है.
एफएटीएफ की अगली बैठक जून में होगी. इसमें पाकिस्तान द्वारा टेरर फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी सरगनाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी. अगर एफएटीएफ इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुआ तो उसका ब्लैकलिस्ट होना तय है.
FATF की ग्रे लिस्ट में आने का मतलब क्या:
FATF का काम आतंकी संगठनों की फंडिंग को रोकने के लिए नियम बनाकर उन्हें लागू कराना है. इस संस्था का गठन 1989 में किया गया था. FATF की ग्रे या ब्लैकलिस्ट में डाले जाने पर देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलना नामुमकिन हो जाता है. इस लिस्ट में नाम आने के बाद पाकिस्तान में विदेशी निवेश के रास्ते भी बंद होते जा रहे हैं.
क्यों ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं आ सका पाकिस्तान:
पाकिस्तान अब भी ग्रे लिस्ट में शामिल है. उसे इस सूची से बाहर आने के लिए 36 मतदाता देशों में से कम से कम 15 का समर्थन चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं होगा. हां, पाकिस्तान इस बार भी खुद को ब्लैकलिस्ट होने से बचाने में सफल रहा, क्योंकि इसके लिए उसे तीन वोट चाहिए थे. चीन, तुर्की और मलेशिया इस काम में उसका साथ दे गए, लेकिन FATF ने उसे ब्लैकलिस्ट करने की वॉर्निंग जरूर दे डाली है.
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