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समाचारदेश Alert Star Digital Team Jan 6, 2020 07:45 PM

पंचतत्व में विलीन हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं गाँधीवादी समाज सुधारक श्री कृष्णचंद्र सहाय

पंचतत्व में विलीन हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं गाँधीवादी समाज सुधारक श्री कृष्णचंद्र सहाय

पंचतत्व में विलीन हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं गाँधीवादी समाज सुधारक श्री कृष्णचंद्र सहाय

लखनऊ, 6 जनवरी। प्रख्यात गाँधीवादी समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री कृष्णचंद्र सहाय का बीती रात 85 वर्ष की आयु में जयपुर में निधन हो गया। श्री सहाय आगरा के गाँधी पीस फाउण्डेशन के डायरेक्टर थे और उन्होंने अपना सारा जीवन गरीबों व दीन-दुखियों की सेवा में समर्पित कर दिया। इसके अलावा, उन्होंने अपना सम्पूर्ण शरीर मेडिकल छात्रों के शोध कार्य हेतु जयपुर के मेडिकल कालेज को दान कर दिया। सिटी मोन्टेसरी स्कूल की संस्थापिका-निदेशिका एवं प्रख्यात शिक्षाविद् डा. (श्रीमती) भारती गाँधी की छोटी बहन से श्री सहाय का विवाह 26 जनवरी 1959 को हुआ था। उनके दो बच्चे हैं एवं उनकी पत्नी का देहान्त करीब 6 वर्ष पूर्व हो गया था। उनका सी.एम.एस. से बहुत लगाव था और सी.एम.एस. के विश्व एकता व विश्व शान्ति के प्रयासों में सदैव तत्पर थे।

            सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गाँधी ने श्री सहाय के निधन पर अपनी श्रद्धान्जलि अर्पित की एवं दिवंगत आत्मा की शान्ति की कामना की। उन्होंने अपनी हार्दिक संवदेना व्यक्त करते हुए कहा कि श्री सहाय का निधन से समाज की अपूर्णीय क्षति हुई है। उन्होंने अपना सारा जीवन महात्मा गाँधी जी के आदर्शों पर चलते हुए बिताया। दीन दुखियों की सेवा करना उनका प्रमुख ध्येय था एवं आजीवन इसी कार्य में संलग्न रहे। उन्होंने गुजरात में आये भीषण भूकम्प के समय जरूरतमंदों की मदद करने हेतु अपने जीवन भर की बचत लगभग एक लाख रूपये दान कर दिये थे। इसके उपरान्त आगरा निवासियों ने उनके लिए एक लाख रूपये एकत्रित कर उनके खाते में जमा किये, जिसे उन्होंने फिर से दान कर दिया।

            डा गाँधी ने बताया कि श्री सहाय सामाजिक जीवन में काफी सक्रिय थे। उन्होंने तीन प्रदेशों मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के 663 डाकुओं का आत्मसमर्पण कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा। इसके अलावा, उन्होंने कर्नाटक के चन्दन तस्कर वीरप्पन के खिलाफ भी आवाज उठाई थी और आंदोलन किया था। श्री सहाय जी भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के सेनानी, प्रखर चिन्तक तथा समाजवादी राजनेता श्री राममनोहर लोहिया जी के विचारों से बहुत प्रभावित थे। वे लोहिया जी के आह्वान पर गोवा में पुर्तगाल शासन के दौरान आंदोलन में शामिल हुए, जिसके दौरान उन्हें गोली भी लगी थी।

            डा. गाँधी ने कहा कि श्री सहाय जी ने समाज में समरसता लाने व दीन-दुखियों की मदद हेतु सारा जीवन संघर्ष किया। उनका जीवन दर्शन सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

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