होम एक हजार में रजिस्टर्ड किराएदारी, पैतृक संपत्तियों का बंटवारा भी सस्ता

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Jul 16, 2024 09:00 PM

एक हजार में रजिस्टर्ड किराएदारी, पैतृक संपत्तियों का बंटवारा भी सस्ता

एक हजार में रजिस्टर्ड किराएदारी, पैतृक संपत्तियों का बंटवारा भी सस्ता

एक हजार में रजिस्टर्ड किराएदारी, पैतृक संपत्तियों का बंटवारा भी सस्ता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग उत्तर प्रदेश स्टांप नियमावली में संशोधन करते हुए जनता को सीधे राहत देने जा रहा है। इसमें दो संशोधन किए जाएंगे।

पहला संशोधन उत्तर प्रदेश रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत मकान मालिक और किराएदार के बीच मात्र 500 से 1000 रुपये के बीच पंजीकृत एग्रीमेंट की सुविधा देने की है। दूसरा-पैतृक संपत्तियों के बंटवारे के लिए 30 फीसदी स्टांप शुल्क के स्थान पर नाम मात्र का शुल्क लिया जाएगा। संशोधन का मसौदा तैयार कर लिया गया है। जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

केंद्र सरकार ने आदर्श किराएदारी अधिनियम-2021 में बनाते हुए देश के सभी राज्यों को भेजा था। राज्यों को इसके आधार पर अपने यहां कानून बनाना था। यूपी में भी यह कानून बन चुका है। इसमें मकान मालिक और किराएदारों के हितों के संरक्षण की बात कही गई है। दोनों का हित तभी संरक्षित हो सकता है, जब वह पंजीकृत किराएनामे पर एग्रीमेंट करेगा। प्रदेश में अभी तक पंजीकृत एग्रीमेंट के लिए चार फीसदी स्टांप शुल्क देना पड़ता है।

इसके चलते लोग इसे पंजीकृत कराने से भागते हैं और 100 रुपये के स्टांप पर किराएनामा तैयार करा लेते हैं। इससे विवाद पर दोनों पक्षों को राहत नहीं मिल पाती है। इसीलिए स्टांप शुल्क के स्थान पर 500 से 1000 रुपये के स्टांप पर पंजीकृत एग्रीमेंट की सुविधा देने की तैयारी है। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग इसके लिए निर्धारित प्रोफार्मा जारी करेगा, जिस पर पंजीकृत एग्रीमेंट कराया जाएगा।

पैतृक संपत्तियों के बंटवारे का रास्ता साफ
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश स्टांप नियमावली की धारा-39 और 45 में संशोधन किया जाएगा। धारा-39 में संपत्ति के बांटवारे और धारा-45 में सेटलमेंट की सुविधा दी जाएगी। पैतृक संपत्तियों के बंटवारे के लिए मौजूदा समय 30 फीसदी स्टांप शुल्क देना पड़ता है। इसके चलते संपत्तियों का बंटवारा नहीं हो पा रहा है।

आपसी समझौते से संपत्तियों का बंटवारा कराने के लिए कुटुंब रजिस्टर पर परिवार के सदस्यों को नाम स्टांप शुल्क देकर चढ़वाना पड़ता है और दूसरा विवाद की स्थिति में सिविल कोर्ट में लोग जाते हैं। इसीलिए यह सहमति बनी है कि नाम मात्र का पैसा लेकर संपत्तियों का बंटवारा कर दिया जाएगा।

स्टांप तथा न्यायालय शुल्क एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल के अनुसार मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तर प्रदेश स्टांप नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। पहला संशोधन पंजीकृत किराएनामें की सुविधा नाम मात्र के पैसे पर देने की है और दूसरा पैतृक संपत्तियों के बंटवारे के लिए 30 फीसदी स्टांप शुल्क लेने की व्यवस्था समाप्त करने की है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जल्द की कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराने की तैयारी है।

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